Asar Ki Namaz Ka Tarika | असर की नमाज का तरीका

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अस्सलाम अलैकुम व रहमतुल्लाह व बरकातहू: दोस्तों हम इस पोस्ट में पड़ने वाले है असर की नमाज (Asar Ki Namaz Ka Tarika) के बारे मे, जैसे की मुझे पता है, आप लोग ज्यादातर गूगल पे इस तरह सर्च करते है –

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तो मैं आज आपके लिए इसकी पूरी जानकारी लाया हूँ, और अगर आपको हमारी ये पोस्ट अच्छी लगे तो इसे अपने दोस्तों के साथ जरूर शेयर करें जिससे अगर आपके दोस्त को भी Asar Ki Namaz Ka Tarika के बारे मे नहीं पता तो,

उसे भी इसका इल्म होगा इससे आपको भी सवाब मिलेगा और साथ हि मुझे भी। और अगर आपको हमारा काम अच्छा लगता है तो हमें Subscribe भी जरूर कर लेँ जिससे आपको Notification मिलती रहें…

Asar Ki Azan Ka Time | Asar Ki Namaz Ka Waqt

NOTE: दोस्तों सबसे पहले जान लीजिए के इस्लाम मे हर मुस्लिम बालिग पर 5 वक्त कि नमाज़ फर्ज है जिनके नाम ये है –

No.नमाज़ का नामलिंक 
1Fajar Ki Namaz (फजर की नमाज)पूरा पड़ें
2Johar Ki Namaz (ज़ोहर की नमाज़)पूरा पड़ें
3Asar Ki Namaz (असर की नमाज)पूरा पड़ें
4Magrib Ki Namaz (मगरीब की नमाज़)पूरा पड़ें
5Isha ki namaz (ईशा की नमाज़)पूरा पड़ें
Asar Ki Namaz Ka Tarika | Asar Ki Namaz Ki Rakat

दोस्तों असर की अजान आमतौर पर शाम के 4 बजे से 5 बजे के करीब होती है मौसम के हिसाब से इसका टाइम आगे पीछे होता राहता जैसे जब शरदी का मौसम होता है तब Asar ki Azan K Waqt 4 बजे हो जाता है

लेकिन यही गर्मी के मौसम मे ये 5 तक होने लगती है, हर मस्जिद मे अलग अलग वक्त होता है असर की नमाज का वक्त 4 बजे से हो जाता है जैसे अजान होती है आप उसके बाद नमाज़ पढ़ सकते है, और दोस्तों अजान का भी हमे खास ध्यान रखना चाहिए,

जब अजान हो तो हमे शांत हो के अजान सुनना चाहिए और उसे दोहराना चाहिय और अजान पूरी होने पर हमे अजान के बाद कि दुआ भी पढ़नी चाहिए क्यूकि इसका बहुत सवाब मिलता है, मैं लिंक दे रहा हूँ अगर आपको ये दुआ याद नहीं तो आप इसे भी जरूर पढ़ें और याद करें।

दोस्तों अगर आप घर पे नमाज़ पढ़ रहे है या फिर आप काही और है तब आप 4 बजे से असर की नमाज पढ़ सकते है, दोस्तों अगर मुमकिन है तो आप ब-जमात मस्जिद मे हि नमाज़ पढ़ें क्यूकि जमात के साथ नमाज़ पढ़ने से ज्यादा सवाब मिलता है।

असर की नमाज कितने रकात है | Asar Ki Namaz Ki Rakat

नमाज का नामकुल रकात
Asar Ki Namaz (असर की नमाज)कुल रकात 8 होती है, जिसमे 4 सुन्नत और 4 फर्ज होती है।
Asar Ki Namaz Ka Tarika | Asar Ki Namaz Ki Rakat

असर की नमाज कि नियत कैसे करें | Asar Ki Namaz Ki Niyat Kaise Karen

दोस्तों नियत के बारे मे मैंने फजर की नमाज और जोहर की नमाज के पोस्ट मे बताया है अगर आपने वो नहीं पढ़ा है तो फिर भी मैं आपको बता देता हूँ, क्यूकि ये जानना जरूरी है, तो चलिए जन्नते है नियत है क्या? नियत को आप इरादा भी केह सकते है जैसे कि आप किसी चीज को करने का इरादा करते है,

बस इसी तरह नमाज़ से पहले हमको नियत करनी होती है, लेकिन दोस्तों एक जरूरी बात जान लीजिए नियत को जुबान से बोलना जरूरी नहीं है, आप अपने मन मे इरादा करेंगे उससे आपकी नमाज़ हो जाएगी, यही है नमाज कि नियत।

दोस्तों Asar Ki Namaz (असर की नमाज) कि नियत आप इस तरह कर सकते है जैसे अगर आप 4 रकात सुन्नत पढ़ने जा रहे है तो आप कहेंगे नियत कि मैंने 4 रकात नमाज सुन्नत असर वास्ते अल्लाह-त-आला के रुख मेरा काबा शरीफ कि तरफ अल्लाहु अकबर। (अपने मन मे कह लेने से आपकी नियत हो जाएगी)

इसी तरह आप फर्ज नमाज़ कि नियत इस तरह कर सकते है, नियत कि मैंने 4 रकात नमाज फर्ज असर वास्ते अल्लाह-त-आला के रुख मेरा काबा शरीफ कि तरफ अल्लाहु अकबर। 

(Note: दोस्तों अगर आप इमाम के पीछे पढ़ रहें है तो तब आप कहेंगे नियत कि मैंने 4 रकात नमाज फर्ज असर वास्ते अल्लाह-त-आला पीछे इस इमाम के रुख मेरा काबा शरीफ कि तरफ अल्लाहु अकबर )

NOTE: दोस्तों अगर आपने बिना नियत के नमाज़ पढ़ी तो आपकी नमाज़ नहीं होगी इस लिए नियत का खास खयाल रखें कि आप कौनसी नमाज़ पढ़ रहे है।

असर की नमाज का सही तरीका | Asar Ki Namaz Ka Tarika

दोस्तों जैसा कि आप लोगों को मालूम होगा कि हम मुसलमान पर पाँच वक्त कि नमाज़ फर्ज है और हमे पूरी कोशिश करनी चाहिए कि आज के इस Busy दौर मे जहा मुसलमान नमाज़ भूलता जा रहा है हमे इसकी फिकर करनी चाहिय कि हम ज्यादा से ज्यादा नमाजों को पड़ें,

Asar Ki Namaz Ka Tarika | असर की नमाज का सही तरीका

क्यूकि नमाज़ से हि मुसलमान कि पहचान है और नमाज़ हमारे प्यारे नबी हुज़ूर सलल्लाहो अलैहि वसल्लम कि आखों कि ठंडक है तो अगर आप नबी से मुहब्बत करते है तो नमाजों को कज़ा न होने दे और नमाज़ जरूर पढ़ें क्यूकि नमाज़ से हर चीज मे बरकत है,

दोस्तों मैंने इससे पहले फजर की नमाज़ और जोहर की नमाज के बारे मे बताया था और आज हम असर की नमाज के बारे मे जानेंगे दोस्तों असर कि नमाज मे कुल 8 रकात होती है, जिसमे 4 रकात सुन्नत और 4 रकात फर्ज होती है,

दोस्तों आपको बता दूँ कि असर की नमाज (Asar Ki Namaz) पाँच नमाजों मे से है और यह दिन कि तीसरी नमाज़ है और ये जोहर कि नमाज के बाद तीसरी नमाज़ है इसका वक्त शाम के 4 बजे के करीब हो जाता है,

चलिए अब जानते है कि हम Asar Ki Namaz Ka Tarika (असर की नमाज) किस तरह पढ़ें, दोस्तों Asar Ki Namaz मे कुल 8 रकात होती है जिसमे 4 रकात सुन्नत होती है फिर इसके बाद 4 रकात फर्ज होती है।

तो दोस्तों आपको नमाज़ शुरू करने से पहले तो वुजू करना होगा, वुजू का सही तरीका (क्लिक करें) जानने के लिए मैं आपको उस पोस्ट कि लिंक दे रहा हूँ आप उसे जरूर पड़ें।

असर की 4 रकात सुन्नत नमाज इस तरह पड़ेंगे | Asar Ki Namaz Ka Tarika

दोस्तों जब आप वुजू कर ले तो फिर इसके बाद आप अब नमाज़ के लिए खड़े हो जाईए आपका रुख किबले कि ओर होना चाहिए फिर आप नियत करिए जैसा मैंने ऊपर बताया उसी तरह से आपको नियत करनी है,

जैसे आप सबसे पहले तो 4 रकात सुन्नत नमाज़ के लिए नियत करिए फिर इसके बाद अल्लाहु अकबर कहते हुए आप अपने हाथों को कानों तक उठा कर अपने पेट पर रख कर बांध लीजिए, फिर इसके बाद आपको सना पढ़ना होगा जो इस तरह है,

सना हिन्दी मे | Sana in Hindi

“सुब हान कल-लाहुम्मा व बिहमदिका व-त बारकस्मुका व-त आला जददुका वला इलाहा गेंरुक”। ये पढ़ने के बाद आप अऊज़ुबिल्लाही मिनाश सैतानिर्रजिम बिस्मिल्लाह हिर्रहमा निर्रहीम पढ़ेंगे फिर आप सूरह फातिहा पढ़ेंगे जो कि इस तरह है – ( सूरह फातिहा का हिन्दी तर्जुमा और फजीलत जानने के लिए क्लिक करें )

  • आल्हामदुलीलही रब्बिल आलमीन
  • अर रहमा निर रहीम
  • मलिकि यौमिद्दीन
  • इययाक न अबुदु व इय्याका नस्तईन
  • इहदिनस सिरआतल मुस्तकीम
  • सिरताल लजीना अन अमता अलय हिम
  • गैरिल मॅगडूबी अलय हिम व लद दालीन। (आमीन)

दोस्तों जब आप सूरह फातिहा पढ़ ले तो फिर आप इसके बाद कुरान कि कोई सूरह या आयत पढ़ें जो भी आपको याद हो चोटी या बढ़ी जैसे कि मान लिजीए आपको सूरह माऊन या सूरह नास याद है तो आप इनमे से कोई पढ़ेंगे

(अगर आपको कोई भी सूरह नहीं याद है तो ये पोस्ट पड़ें Charo Qul In Hindi इससे आपको चार सूरह कि जानकारी हो जाएगी जिसे चारों कुल कहते है। ) आपको समझाने के लिए एक सूरह बता रहा हूँ जो इस तरह है

अल माऊन हिन्दी मे | Surah Al Maun In Hindi | Asar Ki Namaz Ka Tarika (असर की नमाज)

  1. अरा-अईतल लजी यु कज्जीबू बिद्दीन,
  2. फजालि कल लजी यदु-उल यतीम,
  3. वला या हुद्दु अला ता-अमिल मिसकीन,
  4. फा वई लुललिल मु सल्लीन,
  5. अल लजीना हुम-अन सलातिहीम सहून,
  6. अल लजीना हुम युरा-उन,
  7. व यम ना ऊल-मा-ऊन।

सूरह को पढ़ने के बाद आपको रुकु मे जाना है और आप रुकु इस तरह करेंगे जैसा मैं बता रहा हूँ, रुकु मे जाने के लिए आप अपने शरीर को आधा झुका लीजिए इस तरह कि आपकी पीठ सीधी हो इतनी कि अगर आपके पीठ पर एक ग्लास पानी रख दिया जाए तो वो गिरे नहीं,

फिर रुकु मे जाने के बाद आपको रुकु कि तसबिहात पढ़नी है जो इस तरह है – “सुबहाना रब्बिल रब्बीयल अज़ीम” आपको इसको 3 बार या फिर इससे ज्यादा भी आप पढ़ सकते है फिर ये पढ़ने के बाद आप समी अल्लाहु लिमन हमीदह कहते हुए आप एकदम सीधे खड़े हो जाएंगे,

सीधे खड़े होने के बाद आपको सीधे सजदे में जाना है, (अगर आप इमाम के पीछे नमाज़ पढ़ रहें है तब आपको रुकु से खड़े होने के बाद ये कहना होगा- “रब्बाना वा लकल-हम्द”) दोस्तों फिर सजदा आपको इस तरह करना है कि,

सजदे पर जाते वक्त आपका घुटना जमीन पर लगेगा फिर आप अपने हाथ जमीन पर रखिए और फिर आपकी नाक जमीन पर रखेगी और फिर आपका माथा लगेगा,

ऐसे आपको सजदा करना है और आपको फिर सजदे मे ये तसबीह पढ़नी है – “सुबहाना रब्बिल अला” आपको इसको 3 बार या फिर इससे ज्यादा भी आप पढ़ सकते है,

NOTE: दोस्तों आप सजदे मे अल्लाह से दुआ भी मांग सकते है क्यूकि सजदे के वक्त आप अल्लाह से सबसे ज्यादा करीब होते है बैरहाल कई लोगों को ये नहीं पता कि पूरी नमाज़ हि अल्लाह से बात करने का जरिया है)

दोस्तों आपको कुल 2 सजदे करने है (एक सजदा करने के बाद बैठने को जलसा भी कहते है और इस दरमियान जो वक्त रहता है उसमे आप यह भी पढ़ सकते है लेकिन अगर आप नहीं पढ़ते तो भी आपकी नमाज़ हो जाएगी –

“अल्लाउम्मगफिर्ली, व अरहमनी, व आफिनी, व अहदीनी, व अर्ज़ुकनी” हुज़ूर सलल्लाहो अलैहि वसल्लम सजदे के दरमियान मे ये दुआ पढ़ते थे और ऐसी कई दुआ हुज़ूर से साबित है – Reference: Sunan Ibn Majah 898)

दोनों सजदे करने के बाद आपको फिर दूसरी रकात के लिए खड़े हो जाना है और फिर उसी तरह जिस तरह पहली रकात पढ़ी बिल्कुल उसी तरह दूसरी भी पढ़नी है बस इसमे आपको सजदे करने के बाद खड़े नहीं होना है और बैठे रहना है (जिसे जलसे कि हालत मे कहते है)

और आपको फिर अत्तहियात पढ़ना है (नीचे लिखा हुआ है) लेकिन आपको एक चीज ध्यान रखनी है जब अत्तहियात पढ़ेंगे तो उसमे जब ये कहेंगे “अशहदु अल्लाह इलाहा इल्लल्लाहु” तब आपको अपने सीधे हाथ कि पहली उंगली को उठाना है, 

  • अत् तहिय्यातू लिल्लाही वस्सल वातू वत्तह्यीबातु
  • अस्सलामु अलैका या अय्यूहनबी वरहेमतुल्लाही वबरकातूहू
  • अस्सलामू अलैना वला इबादीस्साॅलेहीन
  • अशहदु अल्लाह इलाहा इल्लल्लाहु व अश्हदु अन्न मुहम्मदून अब्दुहू व रसूलूहू
  • अत्तहियात में जब ‘अशहदु अल्लाह इलाहा’ आयेगा तब आप अपनी शहादत की उंगली को उठा कर के छोड़ दें।
  • अत्तहियात के बाद आप दरूद शरीफ पढ़े, दरूद शरीफ पढ़ना जरूरी है।

ये पढ़ने के बाद आप खड़े हो जाएंगे फिर आप उसी तरह नमाज़ पढ़ेंगे जिस तरह पहली रकात पढ़ी जब आपकी तीन रकात नमाज़ हो जाएगी फिर आपको चौथी रकात मे अत्तहियात पढ़ना है और ये पढ़ने के बाद

आपको दुरूद शरीफ (इसे दुरूद इब्राहिमी भी कहते है) पढ़नी जो इस तरह है –

  • अल्लाहुम्मा सल्ले अला
  • मुहम्मदिव व अला आलि मुहम्मदिन
  • कमा सललेँता अला इब्राहिम व अला आलि इब्राहिम इन्नक हमीदुम मजीद।
  • अल्लाहुम्मा बारिक अला मुहम्मदिव व अला आलि मुहम्मदिन
  • कमा बारकता अला इब्राहिम व अला आलि इब्राहिम इन्नक हमीदुम मजीद।

दुरूद शरीफ (इसे दुरूद इब्राहिमी भी कहते है) पढ़ने के बाद आपको दुआ-ए-मसूरा (Dua E Masura In Hindi) पढ़ना है जो इस तरह है –

  • अल्लाहुम्मा इन्नी ज़लमतू नफ़्सी ज़ुलमन कसीरा,
  • वला यग़फिरुज़-ज़ुनूबा इल्ला अनता,
  • फग़फिरली मग़ फि-र-तम मिन इनदिका, वर हमनी इन्नका अनतल गफूरूर्र रहीम।

ये पढ़ लेने के बाद आपको सलाम फेर देना है जो आप इस तरह करेंगे –

पहला सलाम फेरेंगे तो आप आपने दाए काँदे (Right Shoulder) पर देखते हुए कहेंगे अस्सलमों अलैकम वरहमातुलह, फिर दूसरा सलाम फेरेंगे तो आप आपने बाए काँदे (Left Shoulder) पर देखते हुए कहेंगे अस्सलमों अलैकम वरहमातुलह।

Asar Ki Namaz Ka Tarika: यह आपकी 4 रकात सुन्नत नमाज़ पूरी हुई अब आपको फर्ज नमाज़ पढ़नी है, जैसे आपने सुन्नत नमाज़ पढ़ी उसी तरह इसे भी पढ़नी है बस इसमे कुछ चीज़े है जो आपको ध्यान रखनी है नीचे मैंने आपको पूरी जानकारी दी है।

Namaz Ka Tarika In Hindi

असर की 4 रकात फर्ज नमाज इस तरह पड़ेंगे | Asar Ki Namaz Ka Tarika

दोस्तों अब आपने 4 रकात सुन्नत पढ़ लि है तो फिर आप अब 4 रकात फर्ज पड़ेंगे जैसे सुन्नत नमाज़ पढ़ी है उसी तरह फर्ज नमाज़ भी है लेकिन इसमे कुछ बाते है जिनको ध्यान मे रखना जरूरी है,

जैसे हर 4 रकात फर्ज नमाज़ मे सिर्फ दो रकात मे हि सूरह फातिहा के बाद कोई सूरह पढ़ी जाती है बाकी कि दो रकात मे सिर्फ सूरह फातिहा पढ़ कर रुकु मे जा सकते है, ये बात मैंने पहले भी बताया है, बाकी पूरी नामज़ उसी तरह पढ़ी जाती है जिस तरह सुन्नत नमाज़ लेकिन फिर भी मैं आपको पूरा तरीका बता देता हूँ।

दोस्तों आपको 4 रकात फर्ज नमाज़ कि नियत करना है इस तरह – नियत कि मैंने 4 रकात नमाज फर्ज असर वास्ते अल्लाह-त-आला के रुख मेरा काबा शरीफ कि तरफ अल्लाहु अकबर। (NOTE: दोस्तों अगर आप इमाम के पीछे पढ़ रहें है तो तब आप कहेंगे नियत कि मैंने 4 रकात नमाज फर्ज

असर वास्ते अल्लाह-त-आला पीछे इस इमाम के रुख मेरा काबा शरीफ कि तरफ) फिर इसके बाद अल्लाहु अकबर कहते हुए आप अपने हाथों को कानों तक उठा कर अपने पेट पर रख कर बांध लीजिए, फिर इसके बाद आपको सना पढ़ना होगा जो इस तरह है,

“सुब हान कल-लाहुम्मा व बिहमदिका व-त बारकस्मुका व-त आला जददुका वला इलाहा गेंरुक”। ये पढ़ने के बाद आप अऊज़ुबिल्लाही मिनाश सैतानिर्रजिम बिस्मिल्लाह हिर्रहमा निर्रहीम पढ़ेंगे फिर आप सूरह फातिहा पढ़ेंगे जो कि इस तरह है – ( सूरह फातिहा का हिन्दी तर्जुमा और फजीलत जानने के लिए क्लिक करें )

दोस्तों जब आप सूरह फातिहा पढ़ ले तो फिर आप इसके बाद कुरान कि कोई सूरह या आयत पढ़ें जो भी आपको याद हो चोटी या बढ़ी जैसे कि मान लिजीए आपको सूरह माऊन या सूरह नास याद है तो आप इनमे से कोई पढ़ेंगे

(अगर आपको कोई भी सूरह नहीं याद है तो ये पोस्ट पड़ें Charo Qul In Hindi इससे आपको आपको चार सूरह कि जानकारी हो जाएगी जिसे अपन चारों कुल कहते है। )

दोस्त सूरह को पढ़ने के बाद आपको रुकु मे जाना बिल्कुल उसी तरह जिस तरह आपने सुन्नत नमाज़ पढ़ी है, और आप रुकु इस तरह करेंगे जैसा मैं बता रहा हूँ,

रुकु मे जाने के आप अपने शरीर को आधा झुका लीजिए इस तरह कि आपकी पीठ सीधी हो इतनी कि अगर आपके पीठ पर एक ग्लास पानी रख दिया जाए तो वो गिरे नहीं,

फिर रुकु मे जाने के बाद आपको रुकु कि तसबिहात पढ़नी है जो इस तरह है – “सुबहाना रब्बिल रब्बीयल अज़ीम” आपको इसको 3 बार या फिर इससे ज्यादा भी आप पढ़ सकते है फिर ये पढ़ने के बाद आप 

समी अल्लाहु लिमन हमीदह (अगर आप इमाम के पीछे नमाज़ पढ़ रहें है तब आपको रुकु से खड़े होने के बाद ये कहना होगा- “रब्बाना वा लकल-हम्द”) कहते हुए आप एकदम सीधे खड़े हो जाएंगे,

सीधे खड़े होने के बाद आपको सीधे सजदे में जाना है,  दोस्तों फिर सजदा आपको इस तरह करना है कि, सजदे पर जाते वक्त आपका घुटना जमीन पर लगेगा फिर आप अपना हाथ जमीन पर रखिए और फिर

आपकी नाक जमीन पर रखेगी और फिर आपका माथा लगेगा, ऐसे आपको सजदा करना है और आपको फिर सजदे मे ये तसबीह पढ़नी है – “सुबहाना रब्बिल अला” आपको इसको 3 बार या फिर इससे ज्यादा भी आप पढ़ सकते है,

दोस्तों आपको कुल 2 सजदे करने है (एक सजदा करने के बाद बैठने को जलसा भी कहते है और इस दरमियान जो वक्त रहता है उसमे आप यह भी पढ़ सकते है लेकिन अगर आप नहीं पढ़ते तो भी आपकी नमाज़ हो जाएगी

– “अल्लाउम्मगफिर्ली, व अरहमनी, व आफिनी, व अहदीनी, व अर्ज़ुकनी” हुज़ूर सलल्लाहो अलैहि वसल्लम सजदे के दरमियान मे ये दुआ पढ़ते थे और ऐसी कई दुआ हुज़ूर से साबित है – Reference: Sunan Ibn Majah 898)

दोनों सजदे करने के बाद आपको फिर दूसरी रकात के लिए खड़े हो जाना है और फिर उसी तरह जिस तरह पहली रकात पढ़ी बिल्कुल उसी तरह दूसरी भी पढ़नी है बस इसमे आपको सजदे करने के बाद खड़े नहीं होना है और बैठे रहना है (जिसे जलसे कि हालत मे कहते है)

और आपको फिर अत्तहियात पढ़ना जैसे अभी आपने सुन्नत नमाज़ मे पढ़ा बिल्कुल उसी तरह, अत्तहियात मे जब ये कहेंगे “अश्हदू अल्लाह इलाहा इल्लल्लाहु” तब आपको अपने सीधे हाथ कि पहली उंगली को उठाना है,

ये पढ़ने के बाद आप खड़े हो जाएंगे अल्लाहु अकबर कहते हुए फिर आप उसी तरह नमाज़ पढ़ेंगे जिस तरह पहली रकात पढ़ी लेकिन इसमे आप सिर्फ सूरह फातिहा पड़ेंगे और आप रुकु मे चले जाएंगे,

और ऐसे हि चौथी रकात पढ़ेंगे लेकिन फिर चौथी रकात मे आप सिजदा करने के बाद बैठेंगे फिर आप अत्तहियात पड़ेंगे और आपको दुरूद शरीफ (इसे दुरूद इब्राहिमी भी कहते है) पढ़नी है जो इस तरह है –

  • अल्लाहुम्मा सल्ले अला
  • मुहम्मदिव व अला आलि मुहम्मदिन
  • कमा सललेँता अला इब्राहिम व अला आलि इब्राहिम इन्नक हमीदुम मजीद।
  • अल्लाहुम्मा बारिक अला मुहम्मदिव व अला आलि मुहम्मदिन
  • कमा बारकता अला इब्राहिम व अला आलि इब्राहिम इन्नक हमीदुम मजीद।

दुरूद शरीफ (इसे दुरूद इब्राहिमी भी कहते है) पढ़ने के बाद आपको दुआ-ए-मसूरा (Dua E Masura In Hindi) पढ़ना है जो इस तरह है –

  • अल्लाहुम्मा इन्नी ज़लमतू नफ़्सी ज़ुलमन कसीरा,
  • वला यग़फिरुज़-ज़ुनूबा इल्ला अनता,
  • फग़फिरली मग़ फि-र-तम मिन इनदिका, वर हमनी इन्नका अनतल गफूरूर्र रहीम।

ये पढ़ लेने के बाद आपको सलाम फेर देना है जो आप इस तरह करेंगे –

पहला सलाम फेरेंगे तो आप आपने दाए काँदे (Right Shoulder) पर देखते हुए कहेंगे अस्सलमों अलैकम वरहमातुलह, फिर दूसरा सलाम फेरेंगे तो आप आपने बाए काँदे (Left Shoulder) पर देखते हुए कहेंगे अस्सलमों अलैकम वरहमातुलह।

Asar Ki Namaz Ka Tarika: तो दोस्तों आपकी असर कि फर्ज नमाज़ हो चुकी है, किसी भी फर्ज नमाज़ के बाद आप नमाज़ के बाद कि दुआ भी पढ़ सकते है जो इस तरह है –

  • अल्लाहुम्म अंतस्सलामु
  • व मिनकस्सलामु
  • व इलैक यरजिउस्सलामु
  • हाय्यीन रब्बना बिस्सलामि
  • व अदखिल ना दारस्सलामि
  • तबा-रकत रब्बना
  • व तआलय्-त या जल जलालि वाल इकरामिo

इसके बाद आप आयतुल कुर्सी पढ़ेंगे इस पर मैंने अलग से पोस्ट बनाया है उसे आप पढ़ सकते है उस पर मैंने इसका तर्जुमा और इसकी फजीलत के बारे मे बताया है।

आयतुल कुर्सी  पढ़ने के बाद आप ये तसबिहात भी पड़ें –

  • 33 बार सुब्हानलाह ( पाक है अल्लाह )
  • 33 बार अल्हम्दुलिल्लाह ( तमाम तरीफ़े अल्लाह के लिए है )
  • 34 बार अल्लाहु अकबर ( अल्लाह सबसे बढ़ा है )
  • 1 बार ला ईला-ह इल्लल्ला ( अल्लाह के सिवा कोई मआबूद नहीं है )

असर की नमाज कि फजीलत | Asar Ki Namaz Ki Fazilat

दोस्तों इस नमाज़ कि बहुत सी फजीलत है और इसके कई फायदे है चंद मैं आपको बता रहा हूँ –

  • असर की नमाज पढ़ने से आपका मन एकदम शांत रहेगा और आप अच्छे से सोच पाएंगे अल्लाह के लिए क्युकी सिर्फ अल्लाह हि है जो आपको ये अता कर सकते है।
  • जो इंसान असर की नमाज पड़ेगा उससे जन्नत कि इजाजत दी जाएगी हमारे प्यारे नबी  हुज़ूर सलल्लाहो अलैहि वसल्लम ने फरमाया।
  • एक फायदा यह भी है कि जो इंसान असर कि नमाज़ उसके वक्त मे अदा करेगा तो कल कयामत के दिन, वो दूसरों के साथ नहीं बल्कि अकेले अल्लाह के रुबारूह होगा। Reference: Al-Bukhari और Muslims
  • असर की नमाज से आप मगरीब तक अल्लाह के पनाह मे रहते है।

दोस्तों Asar Ki Namaz Ka Tarika (Asar Ki Namaz Ki Rakat) का ये पोस्ट मुकम्मल हुआ इनशाल्लाह अब मैं आपसे मगरीब की नमाज का तरीका के बारे मे बात करूंगा।

पर अफसोस कि बात तो ये है कि आज हम अल्लाह कि इन नेयमतों से बहुत दूर है क्यूकि आज हम नमाज़ से दूर है, हमे फिकर करनी चाहिए कि हामरी नमाज़ न कज़ा हो क्यूकि कल अखरत मे अल्लाह हमसे इसका हिसाब लेंगे तब हम पकड़े जाएंगे।

Conclusion

तो दोस्तों मुझे उम्मीद है की अब आपको Asar Ki Namaz Ka Tarika (असर की नमाज का तरीका) और Asar Ki Namaz Ki Rakat और इसको पढ़ने कि फजीलत के बारे मे मालूम हो गया होगा अगर आपको कुछ पूछना है तो हमे कमेन्ट करके या फिर हमारे सोशल मीडिया अकाउंट मे मैसेज करके पूछ सकते है, और इस पोस्ट को जरूर शेयर करे इससे हमे बहुत खुशी होगी,

और हमारी वेबसाईट Deengyaan.in पर आते रहे, इंशा अल्लाह इसी तरह की इनफार्मेशन मै आप तक पहुचता रहूँगा, अल्लाह हमारे और आपके गुनाहों को माफ फरमाए और हमे इस्लाम कि हर चोटी से बड़ी छीजे सीखने की हिदायत फरमाए, अस्सलाम अलैकुम व रहमतुल्लाह व बरकातहू। FACEBOOKTWITTERINSTAGRAM

FAQ’s (सवाल जवाब)

Q. Asar Ki Namaz Ka Time? | असर की नमाज कितने बजे है?

Ans. असर की नमाज का वक्त 4 बजे से हो जाता है। गर्मियों मे ये आमतौर पर 4 बजे होता है लेकिन शार्डियो मे ये 4 बजे हो जाता है।

Q. असर की नमाज में कितनी रकात होती है?

Ans. दोस्तों असर कि नमाज कुल 8 रकात कि होती है, जिसे 4 सुन्नत और 4 फर्ज होती है।

Q. असर की नमाज के बाद क्या पढ़ा जाता है?

Ans. दोस्तों असर कि नमाज के बाद आप नमाज के बाद कि दुआ और औयतुल कुर्सी पढ़ सकते है और कुछ तसबिहात है जो आप पढ़ सकते है जो इस तरह है –
33 बार सुब्हानलाह ( पाक है अल्लाह )
33 बार अल्हम्दुलिल्लाह ( तमाम तरीफ़े अल्लाह के लिए है )
34 बार अल्लाहु अकबर ( अल्लाह सबसे बढ़ा है )
1 बार ला ईला-ह इल्लल्ला ( अल्लाह के सिवा कोई मआबूद नहीं है )

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Deengyaan.in में आपका खुशामदीद है, मेरा नाम है Anwaar Aslam और मै इस ब्लॉग का Founder और Writer हूँ। पिछले 3 वर्षों से मैं इस वेबसाइट के जरिए इस्लामी जानकारी Share कर रहा हूं। मेरा मकसद है सरल और आसान तरीके से इस्लाम की Knowledge को सब तक पहुंचाना है।

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