Fajar Ki Namaz Ka Tarika | फजर की नमाज का तरीका

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अस्सलाम अलैकुम व रहमतुल्लाह व बरकातहू: दोस्तों हम इस पोस्ट में पड़ने वाले है फजर की नमाज का तरीका (Fajar Ki Namaz Ka Tarika) के बारे मे, जैसे की मुझे पता है, आप लोग ज्यादातर गूगल पे इस तरह सर्च करते है –

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तो मैं आज आपके लिए इसकी पूरी जानकारी लाया हूँ, और अगर आपको हमारी ये पोस्ट अच्छी लगे तो इसे अपने दोस्तों के साथ जरूर शेयर करें जिससे अगर आपके दोस्त को भी Fajar Ki Namaz Ka Tarika के बारे मे नहीं पता तो,

उसे भी इसका इल्म होगा इससे आपको भी सवाब मिलेगा और साथ हि मुझे भी। और अगर आपको हमारा काम अच्छा लगता है तो हमें Subscribe भी जरूर कर लेँ जिससे आपको Notification मिलती रहें…

Fajar Ki Namaz Ka Tarika | फजर की नमाज का तरीका

फजर की नमाज कि रकात | Fajr Ki Namaz Ki Rakat

नमाज का नाम कुल रकात
Fajar Ki Namaz (फजर की नमाज)कुल रकात 4 होती है, जिसमे 2 सुन्नत और 2 फर्ज होती है।
Fajar Ki Namaz Ka Tarika | फजर की नमाज का तरीका

फजर की नमाज के बारे मे | Fajar Ki Namaz Ka Tarika

दोस्तों सबसे पहले जानते है फजर की नमाज के बारे मे कुछ बातें, दोस्तों आजकल का माहौल ऐसा हो गया है कि हम मुसलमान गफलत मे रह कर फजर की नमाज को कज़ा कर देते है

जिससे हमे फजर की नमाज कि फजीलत नहीं मिल पाती जिसपर हमे फिकर करनी चाहिए क्यूकि जैसा कि आप लोग जानते हि होंगे कि 5 वक्त कि नमाज़ हम पर फर्ज है और हमे कोशिश करनी चाहिए कि हम इसे कज़ा न होने दे।

दोस्तों आपको बता दूँ कि फजर कि नमाज पढ़ने का बहुत ज्यादा सवाब मिलता है और ये बहुत हि अजमत और रहमत वाली नमाज़ है क्यूकि आपके दिन कि शुरुआत इस नमाज़ से होती है, दोस्तों फजर की नमाज मे कुल 4 रकात होती है,

जिसमे 2 रकात सुन्नत होती है जिसे आप पहले पढ़ते है और फिर इसके बाद 2 रकात फर्ज पढ़ी जाती है। दोस्तों इस नमाज़ कि बहुत सी फ़ज़ीलत है जो आपको जननी चाहिए इनशाल्लाह मैं आपको इसकी जानकारी दूंगा इस पोस्ट पर।

फजर की अजान का वक्त | Fajar Ki Azan Ka Time

दोस्तों फजर कि अज़ान का वक्त सूरज निकलने से पहले होता है जो तकरीबन 4-5 बजे होता है और दोस्तों आपको अज़ान के बाद कि दुआ भी जरूर पढ़नी चाहिए मैंने इस पर पहले से पोस्ट बना रखा है आप लिंक पर क्लिक करके पढ़ सकते है, इसको पढ़ने के भी बहुत सी फजीलतें है।

दोस्तों फजर की नमाज मे कुल 4 रकात होती है जिसमे 2 सुन्नत और 2 फर्ज होती है। Fajar Ki Namaz, पाँच वक्त कि नमाजों मे सबसे छोटी नमाज है, अब आपको ये मालूम हो गया कि इस नमाज़ मे कितनी रकात होती है, इसके बाद जानते है कि इसकी नियत किस तरह कि जाती है।

NOTE: दोस्तों सबसे पहले जान लीजिए के इस्लाम मे हर मुस्लिम बालिग पर 5 वक्त कि नमाज़ फर्ज है जिनके नाम ये है –

No.नमाज़ का नामलिंक 
1Fajar Ki Namaz (फजर की नमाज)पूरा पड़ें
2Johar Ki Namaz (ज़ोहर की नमाज़)पूरा पड़ें
3Asar Ki Namaz (असर की नमाज)पूरा पड़ें
4Magrib Ki Namaz (मगरीब की नमाज़)पूरा पड़ें
5Isha ki namaz (ईशा की नमाज़)पूरा पड़ें
Fajar Ki Namaz Ka Tarika | फजर की नमाज का तरीका

फजर कि नमाज कि नियत कैसे करें | Fajr Ki Namaz Ki Niyat In Hindi

Namaz Ka Tarika In Hindi

दोस्तों सबसे पहले जान लीजिए नियत है क्या ? नियत को आप इरादा भी केह सकते है जैसे कि आप किसी चीज को करने का इरादा करते है, बस इसी तरह नमाज़ से पहले हमको नियत करनी होती है, लेकिन दोस्तों एक जरूरी बात जान लीजिए नियत को जुबान से बोलना जरूरी नहीं है, आप अपने मन मे इरादा करेंगे उससे आपकी नमाज़ हो जाएगी यही है नमाज कि नियत।

दोस्तों फजर की नमाज कि नियत आप इस कर सकते है जैसे अगर 2 रकात सुन्नत पढ़ने जा रहे है तो आप कहेंगे नियत कि मैंने 2 रकात सुन्नत फ़जर वास्ते अल्लाह-त-आला के रुख मेरा काबा शरीफ कि तरफ अल्लाहु अकबर। (अपने मन मे कह लेने से आपकी नियत हो जाएगी)

इसी तरह आप फर्ज नमाज़ कि नियत इस तरह कर सकते है, नियत कि मैंने 2 रकात फर्ज फ़जर वास्ते अल्लाह-त-आला के रुख मेरा काबा शरीफ कि तरफ अल्लाहु अकबर। (दोस्तों अगर आप इमाम के पीछे पढ़ रहें है तो तब आप कहेंगे नियत कि मैंने 2 रकात नमाज़ फर्ज फ़जर वास्ते अल्लाह-त-आला पीछे इस इमाम के रुख मेरा काबा शरीफ कि तरफ अल्लाहु अकबर )।

NOTE: दोस्तों अगर आपने बिना नियत के नमाज़ पढ़ी तो आपकी नमाज़ नहीं होगी इस लिए नियत का खास खयाल रखें कि आप कौनसी नमाज़ पढ़ रहे है।

फजर की 2 रकात सुन्नत नमाज का तरीका | Fajar Ki Namaz Kaise Padhe

तो दोस्तों आपको सबसे पहले तो वजू करना होगा, वुजू का सही तरीका (क्लिक करें) जानने के लिए मैं आपको उस पोस्ट कि लिंक दे रहा हूँ आप उसे जरूर पड़ें।

दोस्तों आप पहले फजर कि 2 रकात सुन्नत नमाज पड़ेंगे –

जब आप वुजू कर ले तो फिर इसके बाद आप अब नमाज़ के लिए खड़े हो जाईए और आपका रुख किबले कि तरफ होना चाहिए फिर आप नियत करिए जैसा मैंने ऊपर बताया उसी तरह से आपको नियत करनी है, फिर इसके बाद अल्लाहु अकबर कहते हुए आप अपने हाथों को कानों तक उठा कर अपने पेट पर रख कर बांध लीजिए, फिर इसके बाद आपको सना पढ़ना होगा जो इस तरह है,

सना हिन्दी मे | Sana in Hindi

“सुब हान कल-लाहुम्मा व बिहमदिका व-त बारकस्मुका व-त आला जददुका वला इलाहा गेंरुक”। ये पढ़ने के बाद आप अऊज़ुबिल्लाही मिनाश सैतानिर्रजिम बिस्मिल्लाह हिर्रहमा निर्रहीम पढ़ेंगे फिर आप सूरह फातिहा पढ़ेंगे जो कि इस तरह है – (सूरह फातिहा का हिन्दी तर्जुमा और फजीलत जानने के लिए क्लिक करें)

  • आल्हामदुलीलही रब्बिल आलमीन
  • अर रहमा निर रहीम
  • मलिकि यौमिद्दीन
  • इययाक न अबुदु व इय्याका नस्तईन
  • इहदिनस सिरआतल मुस्तकीम
  • सिरताल लजीना अन अमता अलय हिम
  • गैरिल मॅगडूबी अलय हिम व लद दालीन। (आमीन)

दोस्तों जब आप सूरह फातिहा पढ़ ले तो फिर आप इसके बाद कुरान कि कोई सूरह या आयत पढ़ें जो भी आपको याद हो चोटी या बढ़ी जैसे कि मान लिजीए आपको सूरह माऊन या सूरह नास याद है तो आप इनमे से कोई पढ़ेंगे (अगर आपको कोई भी सूरह नहीं याद है तो ये पोस्ट पड़ें Charo Qul In Hindi इससे आपको आपको चार सूरह कि जानकारी हो जाएगी जिसे अपन चारों कुल कहते है। ) आपको समझाने के लिए दो सूरहे बता रहा हूँ जो इस तरह है –

अल माऊन हिन्दी मे | Surah Al Maun In Hindi

  1. अरा-अईतल लजी यु कज्जीबू बिद्दीन,
  2. फजालि कल लजी यदु-उल यतीम,
  3. वला या हुद्दु अला ता-अमिल मिसकीन,
  4. फा वई लुललिल मु सल्लीन,
  5. अल लजीना हुम-अन सलातिहीम सहून,
  6. अल लजीना हुम युरा-उन,
  7. व यम ना ऊल-मा-ऊन।

Surah Naas In Hindi | सूरह नास हिन्दी मे

दोस्तों सूरह नास हिन्दी मे इस तरह है –

  • क़ुल अऊज़ु बिरब्बिन-नास
  • मलिकिन-नास
  • इलाहिन-नास
  • मिन शररिल वसवासिल ख़न्नास-
  • अल्लज़ी युवास्विसु फ़ी सुदूरिन्नास
  • मिनल-जिन्नति वन्नास

दोस्त सूरह को पढ़ने के बाद आपको रुकु मे जाना है और आप रुकु इस तरह करेंगे जैसा मैं बता रहा हूँ, रुकु मे जाने के लिए आप अपने शरीर को आधा झुका लीजिए इस तरह कि आपकी पीठ सीधी हो इतनी कि अगर आपके पीठ पर एक ग्लास पानी रख दिया जाए तो वो गिरे नहीं,

फिर रुकु मे जाने के बाद आपको रुकु कि तसबिहात पढ़नी है जो इस तरह है – “सुबहाना रब्बिल रब्बीयल अज़ीम” आपको इसको 3 बार या फिर इससे ज्यादा भी आप पढ़ सकते है फिर ये पढ़ने के बाद आप समी अल्लाहु लिमन हमीदह कहते हुए आप एकदम सीधे खड़े हो जाएंगे,

सीधे खड़े होने के बाद आपको सीधे सजदे में जाना है, (अगर आप इमाम के पीछे नमाज़ पढ़ रहें है तब आपको रुकु से खड़े होने के बाद ये कहना होगा- “रब्बाना वा लकल-हम्द”) दोस्तों फिर सजदा आपको इस तरह करना है कि,

सजदे पर जाते वक्त आपका घुटना जमीन पर लगेगा फिर आप अपने हाथ जमीन पर रखिए और फिर आपकी नाक जमीन पर रखेगी और फिर आपका माथा लगेगा, ऐसे आपको सजदा करना है और आपको फिर सजदे मे ये तसबीह पढ़नी है – “सुबहाना रब्बिल अला” आपको इसको 3 बार या फिर इससे ज्यादा भी आप पढ़ सकते है,

(NOTE: दोस्तों आप सजदे मे अल्लाह से दुआ भी मांग सकते है क्यूकि सजदे के वक्त आप अल्लाह से सबसे ज्यादा करीब होते है बैरहाल कई लोगों ये नहीं पता कि पूरी नमाज़ हि अल्लाह से बात करने का जरिया है)

दोस्तों आपको कुल 2 सजदे करने है (एक सजदा करने के बाद बैठने को जलसा भी कहते है और इस दरमियान जो वक्त रहता है उसमे आप यह भी पढ़ सकते है लेकिन अगर आप नहीं पढ़ते तो भी आपकी नमाज़ हो जाएगी – “अल्लाउम्मगफिर्ली, व अरहमनी, व आफिनी, व अहदीनी, व अर्ज़ुकनी” हुज़ूर सलल्लाहो अलैहि वसल्लम सजदे के दरमियान मे ये दुआ पढ़ते थे और ऐसी कई दुआ हुज़ूर से साबित है – Reference: Sunan Ibn Majah 898)

दोनों सजदे करने के बाद आपको फिर दूसरी रकात के लिए खड़े हो जाना है और फिर उसी तरह जिस तरह पहली रकात पढ़ी बिल्कुल उसी तरह दूसरी भी पढ़नी है बस इसमे आपको सजदे करने के बाद खड़े नहीं होना है और बैठे रहना है (जलसे कि हालत मे)

और आपको फिर अत्तहियात पढ़ना है (नीचे लिखा हुआ है) लेकिन आपको एक चीज ध्यान रखनी है जब अत्तहियात पढ़ेंगे तो उसमे जब ये कहेंगे “अशहदु अल्लाह इलाहा इल्लल्लाहु” तब आपको अपने सीधे हाथ कि पहली उंगली को उठाना है, 

  • अत् तहिय्यातू लिल्लाही वस्सल वातू वत्तह्यीबातु
  • अस्सलामु अलैका या अय्यूहनबी वरहेमतुल्लाही वबरकातूहू
  • अस्सलामू अलैना वला इबादीस्साॅलेहीन
  • अशहदु अल्लाह इलाहा इल्लल्लाहु व अश्हदु अन्न मुहम्मदून अब्दुहू व रसूलूहू
  • अत्तहियात में जब ‘अशहदु अल्लाह इलाहा’ आयेगा तब आप अपनी शहादत की उंगली को उठा कर के छोड़ दें।
  • अत्तहियात के बाद आप दरूद शरीफ पढ़े, दरूद शरीफ पढ़ना जरूरी है।

ये पढ़ने के बाद आपको दुरूद शरीफ (इसे दुरूद इब्राहिमी भी कहते है) पढ़नी जो इस तरह है –

  • अल्लाहुम्मा सल्ले अला
  • मुहम्मदिव व अला आलि मुहम्मदिन
  • कमा सललेँता अला इब्राहिम व अला आलि इब्राहिम इन्नक हमीदुम मजीद।
  • अल्लाहुम्मा बारिक अला मुहम्मदिव व अला आलि मुहम्मदिन
  • कमा बारकता अला इब्राहिम व अला आलि इब्राहिम इन्नक हमीदुम मजीद।

दुरूद शरीफ (इसे दुरूद इब्राहिमी भी कहते है) पढ़ने के बाद आपको दुआ-ए-मसूरा (Dua E Masura In Hindi) पढ़ना है जो इस तरह है –

  • अल्लाहुम्मा इन्नी ज़लमतू नफ़्सी ज़ुलमन कसीरा,
  • वला यग़फिरुज़-ज़ुनूबा इल्ला अनता,
  • फग़फिरली मग़ फि-र-तम मिन इनदिका, वर हमनी इन्नका अनतल गफूरूर्र रहीम।

ये पढ़ लेने के बाद आपको सलाम फेर देना है जो आप इस तरह करेंगे –

पहला सलाम फेरेंगे तो आप आपने दाए काँदे (Right Shoulder) पर देखते हुए कहेंगे अस्सलमों अलैकम वरहमातुलह ये कहते हुए आप फिर दूसरा सलाम फेरेंगे दूसरा सलाम फेरेंगे तो आप आपने बाए काँदे (Left Shoulder) पर देखते हुए कहेंगे अस्सलमों अलैकम वरहमातुलह।

NOTE: अगर आप फर्ज नमाज़ पढ़ रहे है तो आप सलाम फेरने के बाद एक बार अल्लाहु अकबर और 3 बाद अस्तगफिरूलह कहेंगे।

फजर की 2 रकात फर्ज नमाज़ का तरीका | Fajar Ki Farz Namaz Ka Tarika

Fajar Ki Namaz Ka Tarika | फजर की नमाज का तरीका
– फजर की 2 रकात फर्ज नमाज़ का तरीका –

दोस्तों जैसे आपने 2 रकात सुन्नत नमाज़ पढ़ी उसी तरह आपको फजर कि 2 रकात फर्ज नमाज़ पढ़नी है, उसी तरह आपको पहले नियत करनी है बस नियत मे आपको कहना है नियत कि मैंने 2 रकात नमाज़ फर्ज फजर वास्ते अल्लाह-त-आला के रुख मेरा काबा शरीफ कि तरफ अल्लाहु अकबर

जैसे आप सुन्नत नमाज़ के लिए खड़े हुए बस उसी तरह आप फर्ज नमाज़ के लिए भी खड़े होंगे फिर आप नियत करिए जैसा मैंने ऊपर बताया उसी तरह से आपको नियत करनी है, नियत कि मैंने 2 रकात फर्ज फजर वास्ते अल्लाह-त-आला रुख मेरा काबा शरीफ कि तरफ फिर इसके बाद अल्लाहु अकबर कहते हुए आप अपने हाथों को कानों तक उठा कर अपने पेट पर रख कर बांध लीजिए,

फिर इसके बाद आपको सना पढ़ना होगा जैसे आपने सुन्नत नमाज़ मे पढ़ा है उसी तरह,

ये पढ़ने के बाद आप अऊज़ुबिल्लाही मिनाश सैतानिर्रजिम बिस्मिल्लाह हिर्रहमा निर्रहीम पढ़ेंगे फिर आप सूरह फातिहा पढ़ेंगे जो कि इस तरह है – ( सूरह फातिहा का हिन्दी तर्जुमा और फजीलत जानने के लिए क्लिक करें )

  • आल्हामदुलीलही रब्बिल आलमीन
  • अर रहमा निर रहीम
  • मलिकि यौमिद्दीन
  • इययाक न अबुदु व इय्याका नस्तईन
  • इहदिनस सिरआतल मुस्तकीम
  • सिरताल लजीना अन अमता अलय हिम
  • गैरिल मॅगडूबी अलय हिम व लद दालीन। (आमीन)

दोस्तों जब आप सूरह फातिहा पढ़ ले तो फिर आप इसके बाद कुरान कि कोई सूरह या आयत पढ़ें जो भी आपको याद हो चोटी या बढ़ी जैसे कि मान लिजीए आपको सूरह माऊन या सूरह नास याद है तो आप इनमे से कोई पढ़ेंगे,

(अगर आपको कोई भी सूरह नहीं याद है तो ये पोस्ट पड़ें Charo Qul In Hindi इससे आपको आपको चार सूरह कि जानकारी हो जाएगी जिसे अपन चारों कुल कहते है। ) जैसे आपने सुन्नत नमाज मे सूरह पढ़ी उसी तरह आपको इसमे भी सूरह पढ़नी है।

दोस्तों सूरह को पढ़ने के बाद आपको रुकु मे जाना है और आप रुकु इस तरह करेंगे जैसा मैं बता रहा हूँ, रुकु मे जाने के लिए आप अपने शरीर को आधा झुका लीजिए इस तरह कि आपकी पीठ सीधी हो इतनी कि अगर आपके पीठ पर एक ग्लास पानी रख दिया जाए तो वो गिरे नहीं,

फिर रुकु मे जाने के बाद आपको रुकु कि तसबिहात पढ़नी है जो इस तरह है – “सुबहाना रब्बिल रब्बीयल अज़ीम” आपको इसको 3 बार या फिर इससे ज्यादा भी आप पढ़ सकते है फिर ये पढ़ने के बाद आप समी अल्लाहु लिमन हमीदह कहते हुए आप एकदम सीधे खड़े हो जाएंगे,

सीधे खड़े होने के बाद आपको सीधे सजदे में जाना है, (अगर आप इमाम के पीछे नमाज़ पढ़ रहें है तब आपको रुकु से खड़े होने के बाद ये कहना होगा- “रब्बाना वा लकल-हम्द”) दोस्तों फिर सजदा आपको इस तरह करना है कि,

सजदे पर जाते वक्त आपका घुटना जमीन पर लगेगा फिर आप अपने हाथ जमीन पर रखिए और फिर आपकी नाक जमीन पर रखेगी और फिर आपका माथा लगेगा, ऐसे आपको सजदा करना है और आपको फिर सजदे मे ये तसबीह पढ़नी है- “सुबहाना रब्बिल अला” आपको इसको 3 बार या फिर इससे ज्यादा भी आप पढ़ सकते है,

(NOTE: दोस्तों आप सजदे मे अल्लाह से दुआ भी मांग सकते है क्यूकि सजदे के वक्त आप अल्लाह से सबसे ज्यादा करीब होते है बैरहाल कई लोगों ये नहीं पता कि पूरी नमाज़ हि अल्लाह से बात करने का जरिया है)

दोस्तों आपको कुल 2 सजदे करने है (एक सजदा करने के बाद बैठने को जलसा भी कहते है और इस दरमियान जो वक्त रहता है उसमे आप यह भी पढ़ सकते है लेकिन अगर आप नहीं पढ़ते तो भी आपकी नमाज़ हो जाएगी – “अल्लाउम्मगफिर्ली, व अरहमनी, व आफिनी, व अहदीनी, व अर्ज़ुकनी” हुज़ूर सलल्लाहो अलैहि वसल्लम सजदे के दरमियान मे ये दुआ पढ़ते थे और ऐसी कई दुआ हुज़ूर से साबित है – Reference: Sunan Ibn Majah 898)

दोनों सजदे करने के बाद आपको फिर दूसरी रकात के लिए खड़े हो जाना है और फिर उसी तरह जिस तरह पहली रकात पढ़ी बिल्कुल उसी तरह दूसरी भी पढ़नी है बस इसमे आपको सजदे करने के बाद खड़े नहीं होना है और बैठे रहना है (जलसे कि हालत मे)

और आपको फिर अत्तहियात पढ़ना है (नीचे लिखा हुआ है) लेकिन आपको एक चीज ध्यान रखनी है जब अत्तहियात पढ़ेंगे तो उसमे जब ये कहेंगे “अशहदु अल्लाह इलाहा इल्लल्लाहु” तब आपको अपने सीधे हाथ कि पहली उंगली को उठाना है, 

  • अत् तहिय्यातू लिल्लाही वस्सल वातू वत्तह्यीबातु
  • अस्सलामु अलैका या अय्यूहनबी वरहेमतुल्लाही वबरकातूहू
  • अस्सलामू अलैना वला इबादीस्साॅलेहीन
  • अशहदु अल्लाह इलाहा इल्लल्लाहु व अश्हदु अन्न मुहम्मदून अब्दुहू व रसूलूहू
  • अत्तहियात में जब ‘अशहदु अल्लाह इलाहा’ आयेगा तब आप अपनी शहादत की उंगली को उठा कर के छोड़ दें।
  • अत्तहियात के बाद आप दरूद शरीफ पढ़े, दरूद शरीफ पढ़ना जरूरी है।

ये पढ़ने के बाद आपको दुरूद शरीफ (इसे दुरूद इब्राहिमी भी कहते है) पढ़नी जो इस तरह है –

  • अल्लाहुम्मा सल्ले अला
  • मुहम्मदिव व अला आलि मुहम्मदिन
  • कमा सललेँता अला इब्राहिम व अला आलि इब्राहिम इन्नक हमीदुम मजीद।
  • अल्लाहुम्मा बारिक अला मुहम्मदिव व अला आलि मुहम्मदिन
  • कमा बारकता अला इब्राहिम व अला आलि इब्राहिम इन्नक हमीदुम मजीद।

दुरूद शरीफ (इसे दुरूद इब्राहिमी भी कहते है) पढ़ने के बाद आपको दुआ-ए-मसूरा (Dua E Masura In Hindi) पढ़ना है जो इस तरह है –

  • अल्लाहुम्मा इन्नी ज़लमतू नफ़्सी ज़ुलमन कसीरा,
  • वला यग़फिरुज़-ज़ुनूबा इल्ला अनता,
  • फग़फिरली मग़ फि-र-तम मिन इनदिका, वर हमनी इन्नका अनतल गफूरूर्र रहीम।

ये पढ़ लेने के बाद आपको सलाम फेर देना है जो आप इस तरह करेंगे –

पहला सलाम फेरेंगे तो आप आपने दाए काँदे (Right Shoulder) पर देखते हुए कहेंगे अस्सलमों अलैकम वरहमातुलह ये कहते हुए आप फिर दूसरा सलाम फेरेंगे दूसरा सलाम फेरेंगे तो आप आपने बाए काँदे (Left Shoulder) पर देखते हुए कहेंगे अस्सलमों अलैकम वरहमातुलह।

NOTE: सलाम फेरने के बाद एक बार अल्लाहु अकबर और 3 बाद अस्तगफिरूलह कहेंगे।

तो दोस्तों आपकी फजर की नमाज नमाज़ मुक्कमल हो गई इसके बाद आप नमाज़ के बाद कि दुआ भी पढ़ सकते है जो इस तरह है –

  • अल्लाहुम्म अंतस्सलामु
  • व मिनकस्सलामु
  • व इलैक यरजिउस्सलामु
  • हाय्यीन रब्बना बिस्सलामि
  • व अदखिल ना दारस्सलामि
  • तबा-रकत रब्बना
  • व तआलय्-त या जल जलालि वाल इकरामिo

इसके बाद आप आयतुल कुर्सी पढ़ेंगे इस पर मैंने अलग से पोस्ट बनाया है उसे आप पढ़ सकते है उस पर मैंने इसका तर्जुमा और इसकी फजीलत के बारे मे बताया है।

आयतुल कुर्सी पढ़ने के बाद आप ये तसबिहात भी पड़ें –

  • 33 बार सुब्हानलाह ( पाक है अल्लाह )
  • 33 बार अल्हम्दुलिल्लाह ( तमाम तरीफ़े अल्लाह के लिए है )
  • 34 बार अल्लाहु अकबर ( अल्लाह सबसे बढ़ा है )
  • 1 बार ला ईला-ह इल्लल्ला ( अल्लाह के सिवा कोई मआबूद नहीं है )

यह भी पड़ें – फ़जर की नमाज़ की वेब स्टोरी

फजर की नमाज कि फजीलत | फजर की नमाज के फायदे

Fajar Ki Namaz Ka Tarika | फजर की नमाज का तरीका
– फजर की नमाज कि फजीलत | फजर की नमाज के फायदे –

दोस्तों फजर की नमाज कि बहुत सी फजीलत है और इसके कई फायदे है चंद मैं आपको बता रहा हूँ –

  • फजर की नमाज हमलोग को शैतान से बचाती है, और हुज़ूर सलल्लाहो अलैहि वसल्लम ने फरमाया, “जो इंसान फजर कि नमाज पढ़ता है वो अल्लाह कि पनाह मे अजाता है। (इब्न माजा)
  • फजर कि नमाज़ पढ़ने से हमारे दिल मे सुकून आता है और अल्लाह हमे महफूज रखते है और हमे सही राह दिखाते है।
  • अगर आप अपने दिन कि शुरुआत फजर कि नाम से करते है तो बेशक आपका दिन बहुत अच्छा गुजरेगा और आपके काम मे बरकत होगी।
  • जो इंसान फजर कि नमाज़ सूरज उगने से पहले पढ़ता है वो इंसान जहन्नम से महफूज रहेगा।
  • फजर कि नमाज़ कि दो सुन्नत नमाज़ इस दुनिया के तमाम चीजों से बेहतर है। (Tirmidhi)

दोस्तों पर अफसोस कि बात तो ये है कि आज हम अल्लाह कि इन नेयमतों से बहुत दूर है क्यूकि आज हम अपने नींद को ज्यादा तवज्जु है हमे फिकर करनी चाहिए कि फजर कि नमाज़ काजा न हो क्यूकि कल अखरत मे अल्लाह हमसे इसका हिसाब लेंगे तब हम पकड़े जाएंगे।

यह भी पड़ें –

Conclusion

तो दोस्तों मुझे उम्मीद है की अब आपको Fajar Ki Namaz Ka Tarika (फजर की नमाज का तरीका) और फजर की नमाज को पढ़ने कि फजीलत के बारे मे मालूम हो गया होगा अगर आपको कुछ पूछना है तो हमे कमेन्ट करके या फिर हमारे सोशल मीडिया अकाउंट मे मैसेज करके पूछ सकते है, और इस पोस्ट को जरूर शेयर करे इससे हमे बहुत खुशी होगी,

और हमारी वेबसाईट Deengyaan.in पर आते रहे, इंशा अल्लाह इसी तरह की इनफार्मेशन मै आप तक पहुचता रहूँगा, अल्लाह हमारे और आपके गुनाहों को माफ फरमाए और हमे इस्लाम कि हर चोटी से बड़ी छीजे सीखने की हिदायत फरमाए, अस्सलाम अलैकुम व रहमतुल्लाह व बरकातहू। FACEBOOKTWITTERINSTAGRAM

FAQ’s (सवाल जवाब)

Q. फजर की नमाज का तरीका कैसे पढ़ी जाती है?

Ans. दोस्तों आपको बता दूँ कि फजर कि नमाज पढ़ने का बहुत ज्यादा सवाब मिलता है और ये बहुत हि अजमत और रहमत वाली नमाज़ है क्यूकि आपके दिन कि शुरुआत इस नमाज़ से होती है, दोस्तों फजर की नमाज़ मे कुल 4 रकात होती है,
जिसमे 2 रकात सुन्नत होती है जिसे आप पहले पढ़ते है और फिर इसके बाद 2 रकात फर्ज पढ़ी जाती है। दोस्तों इस नमाज़ कि बहुत सी फ़ज़ीलत है जो आपको जननी चाहिए इनशाल्लाह मैं आपको इसकी जानकारी दूंगा इस पोस्ट पर।

Q. फजर की नमाज कितनी रकात की होती है?

Ans. दोस्तों फजर की नमाज़ मे कुल 4 रकात होती है,
जिसमे 2 रकात सुन्नत होती है जिसे आप पहले पढ़ते है और फिर इसके बाद 2 रकात फर्ज पढ़ी जाती है।

Q. नमाज में क्या क्या पढ़ा जाता है?

Ans. दोस्तों नमाज़ मे सूरह फातिहा और कुरान कि कुछ सूरह और रुकु कि तसबीह, सजदे कि तसबीह और इसके अलावा अत्तहियात और दरूद शरीफ और आखिर मे दुआ-ए-मसूरा पढ़ा जाती है।

Q. पूरी नमाज कैसे पढ़ते हैं?

Ans. सबसे पहले वज़ू करें इसके बाद नियत करे फिर नियत बांध कर सूरह फातिहा और कोई सूरह पड़ें फिर रुकु और सजदा करें इसके बाद अगर 2 रकात कि नमाज़ है तो दूसरी रकात मे अत्तहियात, दरूद शरीफ, दुआ-ए-मसूरा पड़ें फिर सलाम फेरें।

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Deengyaan.in में आपका खुशामदीद है, मेरा नाम है Anwaar Aslam और मै इस ब्लॉग का Founder और Writer हूँ। पिछले 3 वर्षों से मैं इस वेबसाइट के जरिए इस्लामी जानकारी Share कर रहा हूं। मेरा मकसद है सरल और आसान तरीके से इस्लाम की Knowledge को सब तक पहुंचाना है।

2 thoughts on “Fajar Ki Namaz Ka Tarika | फजर की नमाज का तरीका”

  1. अत्तहियात हर 2 रकात k बाद पढ़ी जाती हैं?
    जैसे की 4 रकात सुन्नत पढ़नी है तो इसमें 2 बार अत्तहियात पढ़नी होगी?

    • अस्सलामो अलैकुम,
      जी, अगर आप 4 राकत नमाज पढ़ रही है तो इसमे 2 बार अत्तहियात पढ़ा जाएगा, दूसरी रकात मे और चौथी रकात मे।

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