Johar Ki Namaz Ka Tarika | जोहर की नमाज का सही तरीका

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अस्सलाम अलैकुम व रहमतुल्लाह व बरकातहू: दोस्तों हम इस पोस्ट में पड़ने वाले है जोहर की नमाज का सही तरीका (Johar Ki Namaz Ka Tarika) के बारे मे, जैसे की मुझे पता है, आप लोग ज्यादातर गूगल पे इस तरह सर्च करते है – 

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तो मैं आज आपके लिए इसकी पूरी जानकारी लाया हूँ, और अगर आपको हमारी ये पोस्ट अच्छी लगे तो इसे अपने दोस्तों के साथ जरूर शेयर करें जिससे अगर आपके दोस्त को भी Johar Ki Namaz Ka Tarika के बारे मे नहीं पता तो,

उसे भी इसका इल्म होगा इससे आपको भी सवाब मिलेगा और साथ हि मुझे भी। और अगर आपको हमारा काम अच्छा लगता है तो हमें Subscribe भी जरूर कर लेँ जिससे आपको Notification मिलती रहें…


Johar Ki Namaz Ka Waqt | जोहर की अजान का वक्त

NOTE: दोस्तों सबसे पहले जान लीजिए के इस्लाम मे हर मुस्लिम बालिग पर 5 वक्त कि नमाज़ फर्ज है जिनके नाम ये है –

No.नमाज़ का नामलिंक 
1Fajar Ki Namaz (फजर की नमाज)पूरा पड़ें
2Johar Ki Namaz (ज़ोहर की नमाज़)पूरा पड़ें
3Asar Ki Namaz (असर की नमाज)पूरा पड़ें
4Magrib Ki Namaz (मगरीब की नमाज़)पूरा पड़ें
5Isha ki namaz (ईशा की नमाज़)पूरा पड़ें
– Johar Ki Namaz Ka Tarika | जोहर की नमाज का सही तरीका –

Johar Ki Namaz Ka Tarika | जोहर की नमाज का सही तरीका

दोस्तों जोहर कि अजान आमतौर पर दोपहेर 1 बजे से होने लगती है और ये लगभग 2 बजे से 2:30 तक होती है हर मस्जिद मे अलग अलग वक्त होता है किसी मे 1 बजे तो किसी मे 1:30, जोहर की नमाज का वक्त 1 बजे से हो जाता है जैसे अजान होती है आप उसके बाद नमाज़ पढ़ सकते है, और दोस्तों अजान का भी हमे खास ध्यान रखना चाहिए,

जब अजान हो तो हमे शांत हो के अजान सुनना चाहिए और उसे दोहराना चाहिय और अजान पूरी होने पर हमे अजान के बाद कि दुआ भी पढ़नी चाहिए क्यूकि इसका बहुत सवाब मिलता है,

मैं लिंक दे रहा हूँ अगर आपको ये दुआ याद नहीं तो आप इसे भी जरूर पढ़ें और याद करें।

दोस्तों अगर आप घर पे नमाज़ पढ़ रहे है या फिर आप काही और है तब आप 1 बजे से जोहर की नमाज पढ़ सकते है, दोस्तों अगर मुमकिन है तो आप ब-जमात मस्जिद मे हि नमाज़ पढ़ें क्यूकि जमात के साथ नमाज़ पढ़ने से ज्यादा सवाब मिलता है।

Johar Ki Namaz Ki Rakat | जोहर की नमाज कितने रकात है

नमाज का नाम कुल रकात
Zohar Ki Namaz (जोहर की नमाज)कुल रकात 12 होती है, जिसमे 4 सुन्नत और 4 फर्ज और 2 सुन्नत और 2 नफिल होती है।
– Johar Ki Namaz Ka Tarika | जोहर की नमाज का सही तरीका –

Johar Ki Namaz Ki Niyat Kaise Karen | जोहर की नमाज कि नियत कैसे करें

दोस्तों नियत के बारे मे मैंने फजर कि नमाज के पोस्ट मे बताया है अगर आपने वो नहीं पढ़ा है तो फिर भी मैं आपको बता देता हूँ, क्यूकि ये जानना जरूरी है, तो चलिए जन्नते है नियत है क्या ? नियत को आप इरादा भी केह सकते है जैसे कि आप किसी चीज को करने का इरादा करते है,

बस इसी तरह नमाज़ से पहले हमको नियत करनी होती है, लेकिन दोस्तों एक जरूरी बात जान लीजिए नियत को जुबान से बोलना जरूरी नहीं है, आप अपने मन मे इरादा करेंगे उससे आपकी नमाज़ हो जाएगी, यही है नमाज कि नियत।

Johar Ki Namaz Ka Tarika | जोहर की नमाज का सही तरीका

दोस्तों Johar Ki Namaz (जोहर की नमाज) कि नियत आप इस कर सकते है जैसे अगर आप 4 रकात सुन्नत पढ़ने जा रहे है तो आप कहेंगे नियत कि मैंने 4 रकात नमाज सुन्नत जोहर वास्ते अल्लाह-त-आला के रुख मेरा काबा शरीफ कि तरफ अल्लाहु अकबर। (अपने मन मे कह लेने से आपकी नियत हो जाएगी)

इसी तरह आप फर्ज नमाज़ कि नियत इस तरह कर सकते है, नियत कि मैंने 4 रकात नमाज फर्ज जोहर वास्ते अल्लाह-त-आला के रुख मेरा काबा शरीफ कि तरफ अल्लाहु अकबर। (NOTE: दोस्तों अगर आप इमाम के पीछे पढ़ रहें है तो तब आप कहेंगे नियत कि मैंने 4 रकात नमाज फर्ज जोहर वास्ते अल्लाह-त-आला पीछे इस इमाम के रुख मेरा काबा शरीफ कि तरफ अल्लाहु अकबर )

NOTE: दोस्तों अगर आपने बिना नियत के नमाज़ पढ़ी तो आपकी नमाज़ नहीं होगी इस लिए नियत का खास खयाल रखें कि आप कौनसी नमाज़ पढ़ रहे है।

Johar Ki Namaz Ka Tarika | जोहर की नमाज का सही तरीका

दोस्तों जैसा कि आप लोगों को मालूम होगा कि हम मुसलमान पर पाँच वक्त कि नमाज़ फर्ज है और हमे पूरी कोशिश करनी चाहिए कि आज के इस Busy दौर मे जहा मुसलमान नमाज़ भूलता जा रहा है हमे इसकी फिकर करनी चाहिय कि हम ज्यादा से ज्यादा नमाजों को पड़ें,

क्यूकि नमाज़ से हि मुसलमान कि पहचान है और नमाज़ हमारे प्यारे नबी हुज़ूर सलल्लाहो अलैहि वसल्लम कि आखों कि ठंडक है तो अगर आप नबी से मुहब्बत करते है तो नमाजों को कज़ा न होने दे और नमाज़ जरूर पढ़ें क्यूकि नमाज़ से हर चीज मे बरकत है,

दोस्तों मैंने इससे पहले फजर कि नमाज़ के बारे मे बताया था उसमे 4 रकात कि नमाज होती हैं, 2 सुन्नत और 2 फर्ज, और आज हम जोहर कि नमाज़ के बारे मे जानेंगे,

दोस्तों आपको बता दूँ कि जोहर की नमाज (Zohar Ki Namaz) पाँच नमाजों मे से है और यह दिन कि दूसरी नमाज़ है और ये फजर कि नमाज के बाद दूसरी नमाज़ है इसका वक्त दोपहेर के 1 बजे के करीब हो जाता है, दोस्तों हमे जोहर कि नमाज़ को जरूर पढ़ना चाहिए क्यूकि इसका बहुत सवाब है और ये बहुत हि अजमत और रहमत वाली नमाजों मे से एक है,

क्यूकि आप दिन मे दूसरी बार जोहर मे अल्लाह कि इबादत के लिए आते है, चलिए अब जानते है कि हम जोहर की नमाज किस तरह पढ़ें, दोस्तों Johar Ki Namaz मे कुल 12 रकात होती है जिसमे 4 रकात सुन्नत होती है फिर इसके बाद 4 रकात फर्ज होती है फिर इसके बाद 2 रकात सुन्नत और फिर 2 रकात नफ़िल होती है।

तो दोस्तों आपको नमाज़ शुरू करने से पहले तो वुजू करना होगा, वुजू का सही तरीका (क्लिक करें) जानने के लिए मैं आपको उस पोस्ट कि लिंक दे रहा हूँ आप उसे जरूर पड़ें।

जोहर कि 4 रकात सुन्नत इस तरह पड़ेंगे | Johar Ki Namaz Ka Tarika

दोस्तों सबसे पहले आप वुजू कर ले तो फिर इसके बाद आप अब नमाज़ के लिए खड़े हो जाईए फिर आप नियत करिए जैसा मैंने ऊपर बताया उसी तरह से आपको नियत करनी है, जैसे आप सबसे पहले तो 4 रकात सुन्नत नमाज़ के लिए नियत करिए फिर इसके बाद अल्लाहु अकबर कहते हुए आप अपने हाथों को कानों तक उठा कर अपने पेट पर रख कर बांध लीजिए, फिर इसके बाद आपको सना पढ़ना होगा जो इस तरह है,

सना हिन्दी मे | Sana in Hindi

“सुब हान कल-लाहुम्मा व बिहमदिका व-त बारकस्मुका व-त आला जददुका वला इलाहा गेंरुक”। ये पढ़ने के बाद आप अऊज़ुबिल्लाही मिनाश सैतानिर्रजिम बिस्मिल्लाह हिर्रहमा निर्रहीम पढ़ेंगे फिर आप सूरह फातिहा पढ़ेंगे जो कि इस तरह है – (सूरह फातिहा का हिन्दी तर्जुमा और फजीलत जानने के लिए क्लिक करें)

  • आल्हामदुलीलही रब्बिल आलमीन
  • अर रहमा निर रहीम
  • मलिकि यौमिद्दीन
  • इययाक न अबुदु व इय्याका नस्तईन
  • इहदिनस सिरआतल मुस्तकीम
  • सिरताल लजीना अन अमता अलय हिम
  • गैरिल मॅगडूबी अलय हिम व लद दालीन। (आमीन)

दोस्तों जब आप सूरह फातिहा पढ़ ले तो फिर आप इसके बाद कुरान कि कोई सूरह या आयत पढ़ें जो भी आपको याद हो चोटी या बढ़ी जैसे कि मान लिजीए आपको सूरह माऊन या सूरह नास याद है तो आप इनमे से कोई पढ़ेंगे (अगर आपको कोई भी सूरह नहीं याद है तो ये पोस्ट पड़ें Charo Qul In Hindi इससे आपको चार सूरह कि जानकारी हो जाएगी जिसे चारों कुल कहते है। ) आपको समझाने के लिए एक सूरह बता रहा हूँ जो इस तरह है –

अल माऊन हिन्दी मे | Surah Al Maun In Hindi

  1. अरा-अईतल लजी यु कज्जीबू बिद्दीन,
  2. फजालि कल लजी यदु-उल यतीम,
  3. वला या हुद्दु अला ता-अमिल मिसकीन,
  4. फा वई लुललिल मु सल्लीन,
  5. अल लजीना हुम-अन सलातिहीम सहून,
  6. अल लजीना हुम युरा-उन,
  7. व यम ना ऊल-मा-ऊन।

सूरह को पढ़ने के बाद आपको रुकु मे जाना है और आप रुकु इस तरह करेंगे जैसा मैं बता रहा हूँ, रुकु मे जाने के आप अपने शरीर को आधा झुका लीजिए इस तरह कि आपकी पीठ सीधी हो इतनी कि अगर आपके पीठ पर एक ग्लास पानी रख दिया जाए तो वो गिरे नहीं,

फिर रुकु मे जाने के बाद आपको रुकु कि तसबिहात पढ़नी है जो इस तरह है – “सुबहाना रब्बिल रब्बीयल अज़ीम” आपको इसको 3 बार या फिर इससे ज्यादा भी आप पढ़ सकते है फिर ये पढ़ने के बाद आप समी अल्लाहु लिमन हमीदह कहते हुए आप एकदम सीधे खड़े हो जाएंगे,

सीधे खड़े होने के बाद आपको सीधे सजदे में जाना है, (अगर आप इमाम के पीछे नमाज़ पढ़ रहें है तब आपको रुकु से खड़े होने के बाद ये कहना होगा- “रब्बाना वा लकल-हम्द”) दोस्तों फिर सजदा आपको इस तरह करना है कि, सजदे पर जाते वक्त आपका घुटना जमीन पर लगेगा फिर आप अपने हाथ जमीन पर रखिए और फिर आपकी नाक जमीन पर रखेगी और फिर आपका माथा लगेगा,

ऐसे आपको सजदा करना है और आपको फिर सजदे मे ये तसबीह पढ़नी है – “सुबहाना रब्बिल अला” आपको इसको 3 बार या फिर इससे ज्यादा भी आप पढ़ सकते है,

(NOTE: दोस्तों आप सजदे मे अल्लाह से दुआ भी मांग सकते है क्यूकि सजदे के वक्त आप अल्लाह से सबसे ज्यादा करीब होते है बैरहाल कई लोगों को ये नहीं पता कि पूरी नमाज़ हि अल्लाह से बात करने का जरिया है)

दोस्तों आपको कुल 2 सजदे करने है (एक सजदा करने के बाद बैठने को जलसा भी कहते है और इस दरमियान जो वक्त रहता है उसमे आप यह भी पढ़ सकते है लेकिन अगर आप नहीं पढ़ते तो भी आपकी नमाज़ हो जाएगी – “अल्लाउम्मगफिर्ली, व अरहमनी, व आफिनी, व अहदीनी, व अर्ज़ुकनी” हुज़ूर सलल्लाहो अलैहि वसल्लम सजदे के दरमियान मे ये दुआ पढ़ते थे और ऐसी कई दुआ हुज़ूर से साबित है – Reference: Sunan Ibn Majah 898)

दोनों सजदे करने के बाद आपको फिर दूसरी रकात के लिए खड़े हो जाना है और फिर उसी तरह जिस तरह पहली रकात पढ़ी बिल्कुल उसी तरह दूसरी भी पढ़नी है बस इसमे आपको सजदे करने के बाद खड़े नहीं होना है और बैठे रहना है (जिसे जलसे कि हालत मे कहते है)

और आपको फिर अत्तहियात पढ़ना है (नीचे लिखा हुआ है) लेकिन आपको एक चीज ध्यान रखनी है जब अत्तहियात पढ़ेंगे तो उसमे जब ये कहेंगे “अशहदु अल्लाह इलाहा इल्लल्लाहु” तब आपको अपने सीधे हाथ कि पहली उंगली को उठाना है, 

  • अत् तहिय्यातू लिल्लाही वस्सल वातू वत्तह्यीबातु
  • अस्सलामु अलैका या अय्यूहनबी वरहेमतुल्लाही वबरकातूहू
  • अस्सलामू अलैना वला इबादीस्साॅलेहीन
  • अशहदु अल्लाह इलाहा इल्लल्लाहु व अश्हदु अन्न मुहम्मदून अब्दुहू व रसूलूहू
  • अत्तहियात में जब ‘अशहदु अल्लाह इलाहा’ आयेगा तब आप अपनी शहादत की उंगली को उठा कर के छोड़ दें।
  • अत्तहियात के बाद आप दरूद शरीफ पढ़े, दरूद शरीफ पढ़ना जरूरी है।

ये पढ़ने के बाद आप खड़े हो जाएंगे फिर आप उसी तरह नमाज़ पढ़ेंगे जिस तरह पहली रकात पढ़ी जब आपकी तीन रकात नमाज़ हो जाएगी फिर आपको चौथी रकात मे अत्तहियात पढ़ना है और ये पढ़ने के बाद

आपको दुरूद शरीफ (इसे दुरूद इब्राहिमी भी कहते है) पढ़नी जो इस तरह है –

  • अल्लाहुम्मा सल्ले अला
  • मुहम्मदिव व अला आलि मुहम्मदिन
  • कमा सललेँता अला इब्राहिम व अला आलि इब्राहिम इन्नक हमीदुम मजीद।
  • अल्लाहुम्मा बारिक अला मुहम्मदिव व अला आलि मुहम्मदिन
  • कमा बारकता अला इब्राहिम व अला आलि इब्राहिम इन्नक हमीदुम मजीद।

दुरूद शरीफ (इसे दुरूद इब्राहिमी भी कहते है) पढ़ने के बाद आपको दुआ-ए-मसूरा (Dua E Masura In Hindi) पढ़ना है जो इस तरह है –

  • अल्लाहुम्मा इन्नी ज़लमतू नफ़्सी ज़ुलमन कसीरा,
  • वला यग़फिरुज़-ज़ुनूबा इल्ला अनता,
  • फग़फिरली मग़ फि-र-तम मिन इनदिका, वर हमनी इन्नका अनतल गफूरूर्र रहीम।

ये पढ़ लेने के बाद आपको सलाम फेर देना है जो आप इस तरह करेंगे –

पहला सलाम फेरेंगे तो आप आपने दाए काँदे (Right Shoulder) पर देखते हुए कहेंगे अस्सलमों अलैकम वरहमातुलह, फिर दूसरा सलाम फेरेंगे तो आप आपने बाए काँदे (Left Shoulder) पर देखते हुए कहेंगे अस्सलमों अलैकम वरहमातुलह।

यह आपकी 4 रकात सुन्नत नमाज़ पूरी हुई अब आपको फर्ज नमाज़ पढ़नी है, जैसे आपने सुन्नत नमाज़ पढ़ी उसी तरह इसे भी पढ़नी है बस इसमे कुछ चीज़े है जो आपको ध्यान रखनी है नीचे मैंने आपको पूरी जानकारी दी है।


Johar Ki Namaz Ka Tarika | जोहर की नमाज का सही तरीका

जोहर की 4 रकात फर्ज इस तरह पड़ेंगे | जोहर की नमाज

दोस्तों अब आपने 4 रकात सुन्नत पढ़ लि है तो फिर आप अब 4 रकात फर्ज पड़ेंगे जैसे सुन्नत नमाज़ पढ़ी है उसी तरह फर्ज नमाज़ भी है लेकिन इसमे कुछ बाते है जिनको ध्यान मे रखना जरूरी है,

जैसे हर 4 रकात फर्ज नमाज़ मे सिर्फ दो रकात मे हि सूरह फातिहा के बाद कोई सूरह पढ़ी जाती है बाकी कि दो रकात मे सिर्फ सूरह फातिहा पढ़ कर रुकु मे जा सकते है, बाकी पूरी नामज़ उसी तरह पढ़ी जाती है जिस तरह सुन्नत नमाज़ लेकिन फिर भी मैं आपको पूरा तरीका बता देता हूँ।

दोस्तों आपको 4 रकात फर्ज नमाज़ कि नियत करना है इस तरह – नियत कि मैंने 4 रकात नमाज फर्ज जोहर वास्ते अल्लाह-त-आला के रुख मेरा काबा शरीफ कि तरफ अल्लाहु अकबर।

(NOTE: दोस्तों अगर आप इमाम के पीछे पढ़ रहें है तो तब आप कहेंगे नियत कि मैंने 4 रकात नमाज फर्ज जोहर वास्ते अल्लाह-त-आला पीछे इस इमाम के रुख मेरा काबा शरीफ कि तरफ)

फिर इसके बाद अल्लाहु अकबर कहते हुए आप अपने हाथों को कानों तक उठा कर अपने पेट पर रख कर बांध लीजिए, फिर इसके बाद आपको सना पढ़ना होगा जो इस तरह है,

सना हिन्दी मे | Johar Ki Namaz

“सुब हान कल-लाहुम्मा व बिहमदिका व-त बारकस्मुका व-त आला जददुका वला इलाहा गेंरुक”। ये पढ़ने के बाद आप अऊज़ुबिल्लाही मिनाश सैतानिर्रजिम बिस्मिल्लाह हिर्रहमा निर्रहीम पढ़ेंगे फिर आप सूरह फातिहा पढ़ेंगे जो कि इस तरह है – (सूरह फातिहा का हिन्दी तर्जुमा और फजीलत जानने के लिए क्लिक करें)

  • आल्हामदुलीलही रब्बिल आलमीन
  • अर रहमा निर रहीम
  • मलिकि यौमिद्दीन
  • इययाक न अबुदु व इय्याका नस्तईन
  • इहदिनस सिरआतल मुस्तकीम
  • सिरताल लजीना अन अमता अलय हिम
  • गैरिल मॅगडूबी अलय हिम व लद दालीन। (आमीन)

दोस्तों जब आप सूरह फातिहा पढ़ ले तो फिर आप इसके बाद कुरान कि कोई सूरह या आयत पढ़ें जो भी आपको याद हो चोटी या बढ़ी जैसे कि मान लिजीए आपको सूरह माऊन या सूरह नास याद है

तो आप इनमे से कोई पढ़ेंगे (अगर आपको कोई भी सूरह नहीं याद है तो ये पोस्ट पड़ें Charo Qul In Hindi इससे आपको आपको चार सूरह कि जानकारी हो जाएगी जिसे अपन चारों कुल कहते है। )

दोस्त सूरह को पढ़ने के बाद आपको रुकु मे जाना है और आप रुकु इस तरह करेंगे जैसा मैं बता रहा हूँ, रुकु मे जाने के आप अपने शरीर को आधा झुका लीजिए इस तरह कि आपकी पीठ सीधी हो इतनी कि अगर आपके पीठ पर एक ग्लास पानी रख दिया जाए तो वो गिरे नहीं,

फिर रुकु मे जाने के बाद आपको रुकु कि तसबिहात पढ़नी है जो इस तरह है – “सुबहाना रब्बिल रब्बीयल अज़ीम” आपको इसको 3 बार या फिर इससे ज्यादा भी आप पढ़ सकते है फिर ये पढ़ने के बाद आप समी अल्लाहु लिमन हमीदह कहते हुए आप एकदम सीधे खड़े हो जाएंगे,

सीधे खड़े होने के बाद आपको सीधे सजदे में जाना है, (अगर आप इमाम के पीछे नमाज़ पढ़ रहें है तब आपको रुकु से खड़े होने के बाद ये कहना होगा- “रब्बाना वा लकल-हम्द”) दोस्तों फिर सजदा आपको इस तरह करना है कि, सजदे पर जाते वक्त आपका घुटना जमीन पर लगेगा फिर आप अपना हाथ जमीन पर रखिए और फिर

आपकी नाक जमीन पर रखेगी और फिर आपका माथा लगेगा, ऐसे आपको सजदा करना है और आपको फिर सजदे मे ये तसबीह पढ़नी है – “सुबहाना रब्बिल अला” आपको इसको 3 बार या फिर इससे ज्यादा भी आप पढ़ सकते है,

दोस्तों आपको कुल 2 सजदे करने है (एक सजदा करने के बाद बैठने को जलसा भी कहते है और इस दरमियान जो वक्त रहता है उसमे आप यह भी पढ़ सकते है लेकिन अगर आप नहीं पढ़ते तो भी आपकी नमाज़ हो जाएगी –

“अल्लाउम्मगफिर्ली, व अरहमनी, व आफिनी, व अहदीनी, व अर्ज़ुकनी” हुज़ूर सलल्लाहो अलैहि वसल्लम सजदे के दरमियान मे ये दुआ पढ़ते थे और ऐसी कई दुआ हुज़ूर से साबित है – Reference: Sunan Ibn Majah 898)

दोनों सजदे करने के बाद आपको फिर दूसरी रकात के लिए खड़े हो जाना है और फिर उसी तरह जिस तरह पहली रकात पढ़ी बिल्कुल उसी तरह दूसरी भी पढ़नी है बस इसमे आपको सजदे करने के बाद खड़े नहीं होना है और बैठे रहना है (जिसे जलसे कि हालत मे कहते है)

और आपको फिर अत्तहियात पढ़ना है (नीचे लिखा हुआ है) अत्तहियात मे जब ये कहेंगे “अश्हदू अल्लाह इलाहा इल्लल्लाहु” तब आपको अपने सीधे हाथ कि पहली उंगली को उठाना है, ( दोस्तों 4 रकात कि नमाज़ मे आपको दो बार अत्तहियात पढ़ना होता है)

  • अत् तहिय्यातू लिल्लाही वस्सल वातू वत्तह्यीबातु
  • अस्सलामु अलैका या अय्यूहनबी वरहेमतुल्लाही वबरकातूहू
  • अस्सलामू अलैना वला इबादीस्साॅलेहीन
  • अश्हदू अल्लाह इलाहा इल्लल्लाहु व अश्हदु अन्न मुहम्मदून अब्दुहू व रसूलूहू
  • अत्तहियात में जब ‘अश्हदू अल्लाह इलाहा’ आयेगा तब आप अपनी शहादत की उंगली को उठा कर के छोड़ दें।
  • अत्तहियात के बाद आप दरूद शरीफ पढ़े, दरूद शरीफ पढ़ना जरूरी है।

ये पढ़ने के बाद आप खड़े हो जाएंगे फिर आप उसी तरह नमाज़ पढ़ेंगे जिस तरह पहली रकात पढ़ी लेकिन इसमे आप सिर्फ सूरह फातिहा पड़ेंगे और आप रुकु मे चले जाएंगे और ऐसे हि चौथी रकात पढ़ेंगे लेकिन फिर चौथी रकात मे आप सिजदा करने के बाद बैठेंगे फिर आप अत्तहियात पड़ेंगे और आपको दुरूद शरीफ (इसे दुरूद इब्राहिमी भी कहते है) पढ़नी है जो इस तरह है –

  • अल्लाहुम्मा सल्ले अला
  • मुहम्मदिव व अला आलि मुहम्मदिन
  • कमा सललेँता अला इब्राहिम व अला आलि इब्राहिम इन्नक हमीदुम मजीद।
  • अल्लाहुम्मा बारिक अला मुहम्मदिव व अला आलि मुहम्मदिन
  • कमा बारकता अला इब्राहिम व अला आलि इब्राहिम इन्नक हमीदुम मजीद।

दुरूद शरीफ (इसे दुरूद इब्राहिमी भी कहते है) पढ़ने के बाद आपको दुआ-ए-मसूरा (Dua E Masura In Hindi) पढ़ना है जो इस तरह है –

  • अल्लाहुम्मा इन्नी ज़लमतू नफ़्सी ज़ुलमन कसीरा,
  • वला यग़फिरुज़-ज़ुनूबा इल्ला अनता,
  • फग़फिरली मग़ फि-र-तम मिन इनदिका, वर हमनी इन्नका अनतल गफूरूर्र रहीम।

ये पढ़ लेने के बाद आपको सलाम फेर देना है जो आप इस तरह करेंगे –

पहला सलाम फेरेंगे तो आप आपने दाए काँदे (Right Shoulder) पर देखते हुए कहेंगे अस्सलमों अलैकम वरहमातुलह, फिर दूसरा सलाम फेरेंगे तो आप आपने बाए काँदे (Left Shoulder) पर देखते हुए कहेंगे अस्सलमों अलैकम वरहमातुलह।

तो दोस्तों आपकी जोहर कि फर्ज नमाज़ हो चुकी है, किसी भी फर्ज नमाज़ के बाद आप नमाज़ के बाद कि दुआ भी पढ़ सकते है जो इस तरह है –

  • अल्लाहुम्म अंतस्सलामु
  • व मिनकस्सलामु
  • व इलैक यरजिउस्सलामु
  • हाय्यीन रब्बना बिस्सलामि
  • व अदखिल ना दारस्सलामि
  • तबा-रकत रब्बना
  • व तआलय्-त या जल जलालि वाल इकरामिo

इसके बाद आप आयतुल कुर्सी पढ़ेंगे इस पर मैंने अलग से पोस्ट बनाया है उसे आप पढ़ सकते है उस पर मैंने इसका तर्जुमा और इसकी फजीलत के बारे मे बताया है।

दोस्तों Ayatul Kursi In Hindi मे इस तरह है

  • अल्लाहु ला इलाहा इल्लाहू अल
  • हय्युल क़य्यूम
  • ला तअ’खुज़ुहू सिनतुव वला नौम
  • लहू मा फिस सामावाति वमा फ़िल अर्ज़
  • मन ज़ल लज़ी यश फ़ऊ इन्दहू इल्ला बि इजनिह
  • यअलमु मा बैना अयदी हिम वमा खल्फहुम
  • वला युहीतूना बिशय इम मिन इल्मिही इल्ला बिमा शा अ
  • वसिअ कुरसिय्यु हुस समावति वल अर्ज़
  • वला यऊ दुहू हिफ्ज़ुहुमा
  • वहुवल अलिय्युल अज़ीम

आयतुल कुर्सी पढ़ने के बाद आप ये तसबिहात भी पड़ें –

  • 33 बार सुब्हानलाह ( पाक है अल्लाह )
  • 33 बार अल्हम्दुलिल्लाह ( तमाम तरीफ़े अल्लाह के लिए है )
  • 34 बार अल्लाहु अकबर ( अल्लाह सबसे बढ़ा है )
  • 1 बार ला ईला-ह इल्लल्ला ( अल्लाह के सिवा कोई मआबूद नहीं है )

और दोस्तों फिर बाकी कि बची हुई 2 रकात सुन्नत और 2 रकात नाफिल आप बिल्कुल उसी तरह पड़ेंगे जिस तरह आपने सुन्नत नमाज़ पढ़ी

Johar Ki Namaz Ki Fazilat | जोहर नमाज की फजीलत

दोस्तों इस नमाज़ कि बहुत सी फजीलत है और इसके कई फायदे है चंद मैं आपको बता रहा हूँ –

  • जोहर की नमाज से आप जो कामों कि वजह से थके हुए है ये नमाज़ पढ़ने से दिमाग को तरोताजा कर देती है।
  • जोहर की नमाज में किए गए हर नेक काम का हिसाब वजू से सलाम तक होगा।
  • जोहर की नमाज पढ़ने से उन सभी बीमारियों को दूर कर देती है जो आपके शरीर को नुकसान पहुँचा सकती हैं।
  • जोहर की नमाज आपके दिल को मजबूत करती है और शरीर मे खून कि दौड़ान को बढ़ाता है।
  • जोहर की नमाज आपको शैतान और जिन्न और बुरी चीजों से महफूज रखती है।

दोस्तों पर अफसोस कि बात तो ये है कि आज हम अल्लाह कि इन नेयमतों से बहुत दूर है क्यूकि आज हम नमाज़ से दूर है, हमे फिकर करनी चाहिए कि हामरी नमाज़ न कज़ा हो क्यूकि कल अखरत मे अल्लाह हमसे इसका हिसाब लेंगे तब हम पकड़े जाएंगे।

Conclusion

तो दोस्तों मुझे उम्मीद है की अब आपको Johar Ki Namaz Ka Tarika (जोहर की नमाज का तरीका) और इसको पढ़ने कि फजीलत के बारे मे मालूम हो गया होगा अगर आपको कुछ पूछना है तो

हमे कमेन्ट करके या फिर हमारे सोशल मीडिया अकाउंट मे मैसेज करके पूछ सकते है, और इस पोस्ट को जरूर शेयर करे इससे हमे बहुत खुशी होगी,

और हमारी वेबसाईट Deengyaan.in पर आते रहे, इंशा अल्लाह इसी तरह की इनफार्मेशन मै आप तक पहुचता रहूँगा, अल्लाह हमारे और आपके गुनाहों को माफ फरमाए और हमे इस्लाम कि हर चोटी से बड़ी छीजे सीखने की हिदायत फरमाए, अस्सलाम अलैकुम व रहमतुल्लाह व बरकातहू। FACEBOOKTWITTERINSTAGRAM

FAQ’s (सवाल जवाब)

Q. जोहर में कितनी रकात होते हैं?

Ans. दोस्तों जोहर मे कुल रकात 12 होती है, जिसमे 4 सुन्नत और 4 फर्ज और 2 सुन्नत और 2 नफिल होती है।

Q. Johar Ki Namaz Ka Waqt?

Ans. दोस्तों जोहर की नमाज का वक्त दिन मे 1 बजे के करीब शुरू हो जाता है और ये असर कि अजान से पहले तक राहत है।

Q. जोहर कि अजान का टाइम?

Ans. जोहर कि अजान का टाइम 1 बजे से हो जाता है।

Q. जोहर की नमाज़ की नियत कैसे बांधे?

Ans. (जोहर की नमाज) कि नियत आप इस कर सकते है जैसे अगर आप 4 रकात सुन्नत पढ़ने जा रहे है तो आप कहेंगे नियत कि मैंने 4 रकात नमाज सुन्नत जोहर वास्ते अल्लाह-त-आला के रुख मेरा काबा शरीफ कि तरफ अल्लाहु अकबर। (अपने मन मे कह लेने से आपकी नियत हो जाएगी)

Q. नमाज में कौन कौन सी सूरत पढ़ी जाती है?

Ans. दोस्तों आप नमाज़ मे कुरान की कोई भी सूरत को पढ़ सकते है, आपको जो भी सूरत याद हो पढ़ सकते है, जैसे की –
Surah Naas | सूरह नास
Surah Al Maun | सूरह माऊन

Q. सबसे पहले कौन सी नमाज पढ़ी जाती है?

Ans. दोस्तों पाँच फर्ज नमाजों मे से सबसे पहली नमाज़ फ़जर की नाम पढ़ी जाती है जो की सूरज निकालने से पहले होती है।

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Deengyaan.in में आपका खुशामदीद है, मेरा नाम है Anwaar Aslam और मै इस ब्लॉग का Founder और Writer हूँ। पिछले 3 वर्षों से मैं इस वेबसाइट के जरिए इस्लामी जानकारी Share कर रहा हूं। मेरा मकसद है सरल और आसान तरीके से इस्लाम की Knowledge को सब तक पहुंचाना है।

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