Jumma Ki Namaz Ka Tarika | जुमा की नमाज का तरीका

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अस्सलाम अलैकुम व रहमतुल्लाह व बरकातहू: दोस्तों हम इस पोस्ट में पड़ने वाले है जुमा की नमाज का तरीका (Jumma Ki Namaz Ka Tarika) के बारे मे, जैसे की मुझे पता है, आप लोग ज्यादातर गूगल पे इस तरह सर्च करते है –

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तो मैं आज आपके लिए इसकी पूरी जानकारी लाया हूँ, और अगर आपको हमारी ये पोस्ट अच्छी लगे तो इसे अपने दोस्तों के साथ जरूर शेयर करें जिससे अगर आपके दोस्त को भी Jumma Ki Namaz Ka Tarika के बारे मे नहीं पता तो,

उसे भी इसका इल्म होगा इससे आपको भी सवाब मिलेगा और साथ हि मुझे भी। और अगर आपको हमारा काम अच्छा लगता है तो हमें Subscribe भी जरूर कर लेँ जिससे आपको Notification मिलती रहें…

Jumma Ki Namaz Ka Tarika | जुमा की नमाज का तरीका

NOTE: दोस्तों सबसे पहले जान लीजिए के इस्लाम मे हर मुस्लिम बालिग पर 5 वक्त कि नमाज़ फर्ज है जिनके नाम ये है –

No.नमाज़ का नामलिंक 
1Fajar Ki Namaz (फजर की नमाज)पूरा पड़ें
2Johar Ki Namaz (ज़ोहर की नमाज़)पूरा पड़ें
3Asar Ki Namaz (असर की नमाज)पूरा पड़ें
4Magrib Ki Namaz (मगरीब की नमाज़)पूरा पड़ें
5Isha ki namaz (ईशा की नमाज़)पूरा पड़ें
– Jumma Ki Namaz Ka Tarika | जुमा की नमाज का तरीका –

Jumma Ki Namaz Ka Time | Jumma Ki Namaz Ka Tarika

Jumma Ki Namaz Ka Tarika | जुमा की नमाज का तरीका
– Jumma Ki Namaz Ka Time –

Jumma Ki Namaz Kaise Padhte Hain: दोस्तों जुम्मा की अजान आमतौर पर दिन के 12:30 बजे होती है, और हर मस्जिद मे जुम्मा कि जमात का वक्त अलग अलग होता है, किसी मस्जिद मे 1 बजे से जमात होती है तो किसी मे 1:30 बजे से और किसी मे 1:45 पे, इस तरह जुम्मा कि नमाज़ का वक्त होता है और अजान 12:30 बजे से हि शुरू हो जाती है।

जुम्मे की नमाज की रकात कितनी होती है? | Jumma Ki Namaz Ka Tarika

Jumma Ki Namaz Ka Tarika | जुमा की नमाज का तरीका
– जुम्मे की नमाज की रकात कितनी होती है? –

दोस्तों आपको बता दूँ कि जुम्मा की नमाज़ मे टोटल 14 रकाते होती है, सबसे पहले तो आप 4 रकात सुन्नत नमाज पढ़ते है और फिर 2 रकात फर्ज इमाम शाहब पढ़ाते है, फिर इसके बाद आपको 4 रकात सुन्नत पढ़नी है और फिर 2 रकात सुन्नत और 2 रकात नाफिल पढ़ना है।

जुमा की नमाज़ की नियत कैसे करें? | जुमा की नमाज का तरीका

Jumma Ki Namaz Ka Tarika | जुमा की नमाज का तरीका
– जुमा की नमाज़ की नियत कैसे करें –

दोस्तों जुम्मा की नमाज की नियत आप बिल्कुल उसी तरह करेंगे जैसे आप और नमाजों की नियत करते है, जैसे आप जोहर की नमाज़ की नियत करते है उसी तरह आपको जुम्मा की नमाज़ की नियत करनी है,

जैसे आप 4 रकात सुन्नत नमाज़ पढ़ने जा रहे है तो आप कहेंगे “नियत कि मैंने 4 रकात नमाज सुन्नत जुम्मा वास्ते अल्लाह-त-आला के रुख मेरा काबा शरीफ कि तरफ अल्लाहु अकबर।” ये कहते हुए आप नियत बांध लेंगे।

बस इसी तरह आपको फर्ज नमाज कि नियत करनी है जैसे जब आप फर्ज नमाज के लिय खड़े होंगे तो आप कहेंगे कि “नियत कि मैंने 2 रकात नमाज फर्ज जुम्मा वास्ते अल्लाह-त-आला के पीछे इस इमाम के रुख मेरा काबा शरीफ कि तरफ अल्लाहु अकबर।” जुम्मे कि फर्ज नमाज़ आपको इमाम के पीछे जमात मे हि पढ़नी होगी।

जुम्मा की नमाज के बारे मे कुछ बातें | Jumma Ki Namaz Ka Tarika

Namaz Ka Tarika In Hindi
– Namaz Ka Tarika In Hindi –

Jumma Ki Namaz Kaise Padhte Hain: दोस्तों जुम्मा की नमाज आम नमाजों से अलग है क्यूकि ये हफ्ते मे सिर्फ 1 बार होती है और ये नमाज़ जमात के साथ हि पढ़ी जाती है,

जुमे के दिन को पूरे हफ्ते का सरदार कहा जाता है, और जुम्मे की नमाज़ मे दो बार अजान होती है एक बार जुम्मे कि और फिर जोहर कि और

दोस्तों आपको बताना चाहता हूँ कि जुम्मे का दिन बहुत हि खास दिन होता है जैसे हमलोग ईद की नमाज कि तैयारी करते है ठीक उसी तरह हमे जुम्मे की नमाज कि तैयारी सुबह से करनी चाहिय क्यूकि कई हदीश शरीफ मे भी ये आया है कि जुम्मे के दिन हमे जल्द से जल्द मस्जिद मे जाने कि कोशिश करनी चाहिए क्यूकि,

जो बंदा सबसे पहले मस्जिद मे दाखिल होता है उसे एक हज से बराबर सवाब मिलता है, और फिर जो उसके बाद आता है तो उसके सवाब मे कमी होती जाती है, इस लिए आप कोशिश करें कि जल्द मस्जिद मे जाए और सवाब के हकदार बने।

और दोस्तों एक सबसे जरूरी बात जो लोग खुतबा के वक्त मस्जिद जाते है तो उनकी जुमे की नमाज नहीं होती क्यूकि खुतबे के वक्त मस्जिद के दरवाजे मे जो फरिस्ते खड़े रहते है वो अपना रजिस्टर बंद कर देते है और आपका नाम उसमे नहीं रहता और आपको सिर्फ जोहर का सवाब मिलता है और आप जुमे कि बरकत से महरूम रह जाते है, इस लिए अजान जैसे हि हो आप मस्जिद मे जाने कि कोशिश करें।

अबू हुरैरह (अल्लाह उन्हें खुश रखें) ने बताया कि पैगंबर (सलल्लाहु अलैहि वसल्लम) जुमे के बारे में बात करते हुए कहते हैं,
“जुमे के दिन एक समय होता है जब अल्लाह किसी मुसलमान बंदे के अर्ज़ को कबूल करता है जो इस समय में अपनी नमाज़ में खड़े होकर कुछ मांग रहा होता है।” और पैगंबर (सलल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने अपने हाथ से इशारा करते हुए बताया कि ये पल कुछ ही पल का होता है। (अल-बुखारी और मुस्लिम)

(अल-बुखारी और मुस्लिम)

Jumma Ki Namaz Ka Tarika | Jumma Ki Namaz Kaise Padhte Hain

Jumma Ki Namaz Ka Tarika | जुमा की नमाज का तरीका
– Jumma Ki Namaz Ka Tarika | जुमा की नमाज का तरीका –

दोस्तों जैसा कि मैंने ऊपर आपको बता दिया है कि जुमे कि नमाज कि नियत कैसे करते है और जुमे कि नमाज़ मे कितनी रकात होती है तो अब जानते है की जुमे कि नमाज़ आप कैसे पढ़ेंगे तो सबसे पहले आप वज़ू करेंगे ( वज़ू के बारे मे मैंने पूरी पोस्ट बनाई है उसकी लिंक दे रहा हूँ आप उसे जरूर पड़ें ) जब आप वज़ू बना लेँ तो फिर आप नमाज़ के लिए खड़े हो जाए और नियत करें सबसे पहले 4 रकात सुन्नत नमाज़ पढ़ें,

जैसे आप जोहर की सुन्नत नमाज़ पढ़ते है ठीक उसी तरह आपको इसकी भी पढ़नी है, जब आप 4 रकात सुन्नत नमाज़ पढ़ लेँ तो फिर इसके बाद अगर वक्त है तो आप दरूद शरीफ पढ़ें या कुरान भी पढ़ सकते है, फिर इमाम साहब खुतबा शुरू करेंगे दोस्तों खुतबा सुन्ना वाजिब है, तो आप शांत हो कर इसे सुने, खुतबा पूरा होने के बाद नमाज़ खड़ी हो जाएगी तो इमाम साहब जुमे की 2 रकात फर्ज नमाज पढ़ाएंगे

कुछ और पोस्ट जो आपको पढ़ना चाहिए –

जुमा की फर्ज नमाज का तरीका | जानिए जुमा की नमाज का तरीका

दोस्तों जब नमाज़ खड़ी होगी तो आपको पहले 2 रकात फर्ज नमाज कि नियत करनी है “नियत कि मैंने 2 रकात नमाज फर्ज जुम्मा वास्ते अल्लाह-त-आला के पीछे इस इमाम के रुख मेरा काबा शरीफ कि तरफ अल्लाहु अकबर।” ( दोस्तों नियत को जुबान से बोलना जरूरी नहीं है, आप अपने मन मे कह लेंगे तो आपकी नियत हो जाएगी ) फिर आप नियत बांध लीजिय फिर आप सना पड़ेंगे जो इस तरह है –

“सुब हान कल-लाहुम्मा व बिहमदिका व-त बारकस्मुका व-त आला जददुका वला इलाहा गेंरुक”। 

ये पढ़ने के बाद आप अऊज़ुबिल्लाही मिनाश सैतानिर्रजिम बिस्मिल्लाह हिर्रहमा निर्रहीम पढ़ेंगे फिर इमाम साहब सूरह फातिहा पढ़ेंगे जब वो सूरह फातिहा पढ़ लेंगे तो आपको अमीन कहना है,

फिर वो कुरान कि कोई सूरह या आयत पड़ेंगे फिर इसके बाद वो अल्लाहु अकबर कहेंगे और रुकु मे जाएंगे आपको भी अल्लाहु अकबर कहते हुए रुकु मे जाना है और रुकु कि तसबिहात पढ़नी है,

जो इस तरह है  “सुबहाना रब्बिल रब्बीयल अज़ीम” आपको इसको 3 बार या फिर इससे ज्यादा भी आप पढ़ सकते है फिर इमाम साहब समी अल्लाहु लिमन हमीदह कहते हुए रुकु से खड़े होंगे तो आपको “रब्बाना वा लकल-हम्द” कहना है और खड़े होना है,

फिर इमाम साहब अल्लाहु अकबर कहते हुए सिजदे मे चले जाएंगे आपको भी अल्लाहु अकबर कहते हुए सिजदे मे जाना है और फिर सिजदे कि तसबिहात पढ़नी है, जो इस तरह है “सुबहाना रब्बिल अला” आपको इसको 3 बार या फिर इससे ज्यादा भी आप पढ़ सकते है,

कुल 2 सिजदे होंगे फिर अल्लाहु अकबर कहते हुए खड़े हो जाएंगे फिर बिल्कुल उसी तरह जिस तरह पहली रकात हुई है उसी तरह दूसरी भी पढ़नी है बस इसमे सिजदा करने के बाद बैठे रहना है और आपको फिर अत्तहियात पढ़ना है

लेकिन आपको एक चीज ध्यान रखनी है जब अत्तहियात पढ़ेंगे तो उसमे जब ये कहेंगे “अशहदु अल्लाह इलाहा इल्लल्लाहु” तब आपको अपने सीधे हाथ कि पहली उंगली को उठाना है, 

  • अत् तहिय्यातू लिल्लाही वस्सल वातू वत्तह्यीबातु
  • अस्सलामु अलैका या अय्यूहनबी वरहेमतुल्लाही वबरकातूहू
  • अस्सलामू अलैना वला इबादीस्साॅलेहीन
  • अशहदु अल्लाह इलाहा इल्लल्लाहु व अश्हदु अन्न मुहम्मदून अब्दुहू व रसूलूहू
  • अत्तहियात में जब ‘अशहदु अल्लाह इलाहा’ आयेगा तब आप अपनी शहादत की उंगली को उठा कर के छोड़ दें।
  • अत्तहियात के बाद आप दरूद शरीफ पढ़े, दरूद शरीफ पढ़ना जरूरी है।

फिर दरूद शरीफ पड़ेंगे

  • अल्लाहुम्मा सल्ले अला
  • मुहम्मदिव व अला आलि मुहम्मदिन
  • कमा सललेँता अला इब्राहिम व अला आलि इब्राहिम इन्नक हमीदुम मजीद।
  • अल्लाहुम्मा बारिक अला मुहम्मदिव व अला आलि मुहम्मदिन
  • कमा बारकता अला इब्राहिम व अला आलि इब्राहिम इन्नक हमीदुम मजीद।

दुरूद शरीफ पढ़ने के बाद आपको दुआ-ए-मसूरा (Dua E Masura In Hindi) पढ़ना है जो इस तरह है –

  • अल्लाहुम्मा इन्नी ज़लमतू नफ़्सी ज़ुलमन कसीरा,
  • वला यग़फिरुज़-ज़ुनूबा इल्ला अनता,
  • फग़फिरली मग़ फि-र-तम मिन इनदिका, वर हमनी इन्नका अनतल गफूरूर्र रहीम।

फिर जब इमाम साहब सलाम फेरेंगे तो आपको भी साथ मे सलाम फेरना है

पहला सलाम फेरेंगे तो आप आपने दाए काँदे (Right Shoulder) पर देखते हुए कहेंगे अस्सलमों अलैकम वरहमातुलह, फिर दूसरा सलाम फेरेंगे तो आप आपने बाए काँदे (Left Shoulder) पर देखते हुए कहेंगे अस्सलमों अलैकम वरहमातुलह।

तो दोस्तों आपकी जुमे कि फर्ज नमाज पूरी हुई किसी भी फर्ज नमाज़ के बाद आप नमाज़ के बाद कि दुआ भी पढ़ सकते है जो इस तरह है –

  • अल्लाहुम्म अंतस्सलामु
  • व मिनकस्सलामु
  • व इलैक यरजिउस्सलामु
  • हाय्यीन रब्बना बिस्सलामि
  • व अदखिल ना दारस्सलामि
  • तबा-रकत रब्बना
  • व तआलय्-त या जल जलालि वाल इकरामिo

इसके बाद आप आयतुल कुर्सी पढ़ेंगे इस पर मैंने अलग से पोस्ट बनाया है उसे आप पढ़ सकते है उस पर मैंने इसका तर्जुमा और इसकी फजीलत के बारे मे बताया है।

आयतुल कुर्सी पढ़ने के बाद आप ये तसबिहात भी पड़ें –

  • 33 बार सुब्हानलाह ( पाक है अल्लाह )
  • 33 बार अल्हम्दुलिल्लाह ( तमाम तरीफ़े अल्लाह के लिए है )
  • 34 बार अल्लाहु अकबर ( अल्लाह सबसे बढ़ा है )
  • 1 बार ला ईला-ह इल्लल्ला ( अल्लाह के सिवा कोई मआबूद नहीं है )

तो दोस्तों इसके बाद आपको फिर जो सुन्नत और नाफिल नमाज बची हुई है उसे पढ़ना है, तो ये हो गया Jumma Ki Namaz Kaise Padhte Hain | जुमा की नमाज का तरीका के बारे मे पूरी जानकारी।

Conclusion

तो दोस्तों मुझे उम्मीद है की अब आपको जुमा की नमाज का तरीका (Jumma Ki Namaz Ka Tarika) और इसको पढ़ने का सुन्नत तरीका और साथ हि कुछ और बातों के बारे मे मालूम हो गया होगा अगर आपको कुछ पूछना है तो हमे कमेन्ट करके या फिर हमारे सोशल मीडिया अकाउंट मे मैसेज करके पूछ सकते है, और इस पोस्ट को जरूर शेयर करे इससे हमे बहुत खुशी होगी,

और हमारी वेबसाईट Deengyaan.in पर आते रहे, इंशा अल्लाह इसी तरह की इनफार्मेशन मै आप तक पहुचता रहूँगा, अल्लाह हमारे और आपके गुनाहों को माफ फरमाए और हमे इस्लाम कि हर चोटी से बड़ी छीजे सीखने की हिदायत फरमाए, अस्सलाम अलैकुम व रहमतुल्लाह व बरकातहू। FACEBOOKTWITTERINSTAGRAM

FAQ’s (सवाल जवाब)

Q. जुम्मे की नमाज की रकात कितनी होती है?

Ans. दोस्तों आपको बता दूँ कि जुम्मा की नमाज़ मे टोटल 14 रकाते होती है, सबसे पहले तो आप 4 रकात सुन्नत नमाज पढ़ते है और फिर 2 रकात फर्ज इमाम शाहब पढ़ाते है, फिर इसके बाद आपको 4 रकात सुन्नत पढ़नी है और फिर 2 रकात सुन्नत और 2 रकात नाफिल पढ़ना है।

Q. जुमे की नमाज घर पर कैसे पढ़ें?

Ans. दोस्तों आप जुमे कि नमाज घर पर नहीं पढ़ सकते है क्यूकि जुमे की नमाज जमात के साथ हि होती है, अगर आप घर पर पढ़ रहे है या फिर आप काही और है तो तो फिर आपको जुमे कि वजह जोहर की नमाज़ पढ़नी होगी।

Q. पांच वक्त की नमाज में कितनी रकात होती है?

Ans. दोस्तों पाँच वक्त की नमाज मे कुल 48 रकात नमाज होती है।

Q. क्या जुमे की नमाज औरतों पर फर्ज है?

Ans. नहीं औरतों पर फर्ज नहीं है, ये मर्दों पर फर्ज है औरते जुमे कि वजह जोहर की नमाज़ अदा करेंगी।

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Deengyaan.in में आपका खुशामदीद है, मेरा नाम है Anwaar Aslam और मै इस ब्लॉग का Founder और Writer हूँ। पिछले 3 वर्षों से मैं इस वेबसाइट के जरिए इस्लामी जानकारी Share कर रहा हूं। मेरा मकसद है सरल और आसान तरीके से इस्लाम की Knowledge को सब तक पहुंचाना है।

2 thoughts on “Jumma Ki Namaz Ka Tarika | जुमा की नमाज का तरीका”

  1. अस्सलाम अलैकुम व रहमतुल्लाह व बरकातहू,
    क्या माह रमजान में औरतें जुमे की नवाज अदा कर सकती हैं ।।

    • वालैकुमस्सलाम वरहमतुल्लाहि वबरकतु भाई, जी आपको बता दूँ की जुम्मा की नमाज़ मर्दों पर फर्ज है औरतों पर नहीं, हदीस के मुताबिक़ औरतें जुमा की नमाज पढ़ना चाहे तो पढ़ सकती है लेकिन Jumma की नमाज बिना खुतबा और इमाम के मुकम्मल नहीं होती है।

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