Magrib Ki Namaz Ka Tarika | मगरिब की नमाज का तरीका

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अस्सलाम अलैकुम व रहमतुल्लाह व बरकातहू: दोस्तों हम इस पोस्ट में पड़ने वाले है मगरिब की नमाज का तरीका (Magrib Ki Namaz Ka Tarika) के बारे मे, जैसे की मुझे पता है, आप लोग ज्यादातर गूगल पे इस तरह सर्च करते है –

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तो मैं आज आपके लिए इसकी पूरी जानकारी लाया हूँ। और अगर आपको हमारी ये पोस्ट अच्छी लगे तो इसे अपने दोस्तों के साथ जरूर शेयर करें जिससे अगर आपके दोस्त को भी Magrib Ki Namaz Ka Tarika के बारे मे नहीं पता तो,

उसे भी इसका इल्म होगा इससे आपको भी सवाब मिलेगा और साथ हि मुझे भी। और अगर आपको हमारा काम अच्छा लगता है तो हमें Subscribe भी जरूर कर लेँ जिससे आपको Notification मिलती रहें…

Magrib Ki Namaz Ka Tarika | मगरिब की नमाज का तरीका

NOTE: दोस्तों सबसे पहले जान लीजिए के इस्लाम मे हर मुस्लिम बालिग पर 5 वक्त कि नमाज़ फर्ज है जिनके नाम ये है –

No.नमाज़ का नामलिंक 
1Fajar Ki Namaz (फजर की नमाज)पूरा पड़ें
2Johar Ki Namaz (ज़ोहर की नमाज़)पूरा पड़ें
3Asar Ki Namaz (असर की नमाज)पूरा पड़ें
4Magrib Ki Namaz (मगरीब की नमाज)पूरा पड़ें
5Isha ki namaz (ईशा की नमाज़)पूरा पड़ें
– Magrib Ki Namaz Ka Tarika | मगरिब की नमाज का तरीका –

Magrib Ki Namaz Ka Time | Magrib Ki Namaz Ka Waqt

Magrib Ki Namaz Ka Tarika | मगरिब की नमाज का तरीका
– Magrib Ki Namaz Ka Tarika | मगरिब की नमाज का तरीका –

दोस्तों मगरीब की अजान दिन ढलने के बाद होती जब सूरज ढाल जाता है तब ये लग भाग 6:30 से 7 के करीब होता है, लेकिन यही अगर शरदी का वक्त होता है तो शार्डियो मे दिन जल्दी ढाल जाता है जिस वजह से मगरीब की नमाज का वक्त भी जल्दी हो जाता है,

ये भी मौसम के ऊपर निर्भर होता है, और दोस्तों मगरीब की नमाज हि ऐसे नमाज है अजान होती है इसके बाद तुरंत खड़ी हो जाती है, क्यूकि इस नमाज में पहले कोई सुन्नत नमाज नहीं सीधे फर्ज नमाज है इसलिए। और दोस्तों अजान का भी हमे खास ध्यान रखना चाहिए,

जब अजान हो तो हमे शांत हो के अजान सुनना चाहिए और उसे दोहराना चाहिय और अजान पूरी होने पर हमे अजान के बाद कि दुआ भी पढ़नी चाहिए क्यूकि इसका बहुत सवाब मिलता है, मैं लिंक दे रहा हूँ अगर आपको ये दुआ याद नहीं तो आप इसे भी जरूर पढ़ें और याद करें।

दोस्तों अगर आप घर पे नमाज़ पढ़ रहे है या फिर आप काही और है तब आप 6 से 7 बजे जब लगे कि दिन ढल गया है तब आप नमाज पढ़ सकते है, दोस्तों अगर मुमकिन है तो आप ब-जमात मस्जिद मे हि नमाज़ पढ़ें क्यूकि जमात के साथ नमाज़ पढ़ने से ज्यादा सवाब मिलता है।

Magrib Ki Namaz Kitni Rakat Hoti Hai | Magrib Ki Namaz Ki Rakat

नमाज का नामकुल रकात
Magrib Ki Namaz (मगरीब की नमाज)कुल रकात 7 होती है, जिसमे 3 फर्ज 2 सुन्नत और 2 नाफिल होती है।
Magrib Ki Namaz Ka Tarika | Magrib Ki Namaz Ki Rakat

मगरीब की नमाज कि नियत कैसे करें | Magrib Ki Namaz Ka Tarika

दोस्तों नियत के बारे मे मैंने फजर की नमाज के पोस्ट मे बताया है अगर आपने वो नहीं पढ़ा है तो फिर भी मैं आपको बता देता हूँ, क्यूकि ये जानना जरूरी है, तो चलिए जन्नते है नियत है क्या? नियत को आप इरादा भी केह सकते है जैसे कि आप किसी चीज को करने का इरादा करते है,

बस इसी तरह नमाज़ से पहले हमको नियत करनी होती है, लेकिन दोस्तों एक जरूरी बात जान लीजिए नियत को जुबान से बोलना जरूरी नहीं है, आप अपने मन मे इरादा करेंगे उससे आपकी नमाज़ हो जाएगी, यही है नमाज कि नियत।

दोस्तों Magrib Ki Namaz (मगरीब की नमाज) कि नियत आप इस तरह करेंगे जैसे आप पहले 3 रकात फर्ज पढ़ने तो आप कहेंगे नियत कि मैंने 3 रकात नमाज फर्ज मगरीब वास्ते अल्लाह-त-आला के रुख मेरा काबा शरीफ कि तरफ अल्लाहु अकबर। 

(Note: दोस्तों अगर आप इमाम के पीछे पढ़ रहें है तो तब आप कहेंगे नियत कि मैंने 3 रकात नमाज फर्ज मगरीब वास्ते अल्लाह-त-आला पीछे इस इमाम के रुख मेरा काबा शरीफ कि तरफ अल्लाहु अकबर )

(अपने मन मे कह लेने से आपकी नियत हो जाएगी)

इसी तरह आप फिर इसके बाद सुन्नत नमाज और नाफिल नमाज़ कि नियत इस तरह कर सकते है, नियत कि मैंने 2 रकात नमाज सुन्नत मगरीब वास्ते अल्लाह-त-आला के रुख मेरा काबा शरीफ कि तरफ अल्लाहु अकबर। और इसी तरह नाफिल नमाज कि नियात रहेगी।  

NOTE: दोस्तों अगर आपने बिना नियत के नमाज़ पढ़ी तो आपकी नमाज़ नहीं होगी इस लिए नियत का खास खयाल रखें कि आप कौनसी नमाज़ पढ़ रहे है।

Magrib Ki Namaz Ka Tarika | मगरीब की नमाज का सही तरीका

दोस्तों जैसा कि आप लोगों को मालूम होगा कि हम मुसलमान पर पाँच वक्त कि नमाज़ फर्ज है और हमे पूरी कोशिश करनी चाहिए कि आज के इस Busy दौर मे जहा मुसलमान नमाज़ भूलता जा रहा है हमे इसकी फिकर करनी चाहिय कि हम ज्यादा से ज्यादा नमाजों को पड़ें,

क्यूकि नमाज़ से हि मुसलमान कि पहचान है और नमाज़ हमारे प्यारे नबी हुज़ूर सलल्लाहो अलैहि वसल्लम कि आखों कि ठंडक है तो अगर आप नबी से मुहब्बत करते है तो नमाजों को कज़ा न होने दे और नमाज़ जरूर पढ़ें क्यूकि नमाज़ से हर चीज मे बरकत है,

दोस्तों मैंने इससे पहले फजर की नमाज़ और जोहर की नमाज और असर की नमाज के बारे मे बताया था और आज हम मगरीब की नमाज के बारे मे जानेंगे दोस्तों मगरीब कि नमाज मे कुल 7 रकात होती है, जिसमे 3 फर्ज और 2 रकात सुन्नत और 2 रकात नाफिल होती है,

दोस्तों आपको बता दूँ कि मगरीब की नमाज (Magrib Ki Namaz) पाँच नमाजों मे से है और यह दिन कि चौथी नमाज़ है और ये असर की नमाज के बाद चौथी नमाज़ है इसका वक्त शाम मे दिन ढलने के बाद होता है करीब 6 से 7 के बीच,

तो दोस्तों आपको नमाज़ शुरू करने से पहले तो वुजू करना होगा, वुजू का सही तरीका (क्लिक करें) जानने के लिए मैं आपको उस पोस्ट कि लिंक दे रहा हूँ आप उसे जरूर पड़ें।

Namaz Ka Tarika In Hindi

मगरीब कि 3 रकात फर्ज नमाज इस तरह पड़ेंगे | Magrib Ki Namaz Ki Rakat

दोस्तों जब आप वुजू कर ले तो फिर इसके बाद आप अब नमाज़ के लिए खड़े हो जाईए आपका रुख किबले कि ओर होना चाहिए फिर आप नियत करिए जैसा मैंने ऊपर बताया उसी तरह से आपको नियत करनी है,

जैसे आप सबसे पहले तो 3 रकात फर्ज माज़ के लिए नियत करिए फिर इसके बाद अल्लाहु अकबर कहते हुए आप अपने हाथों को कानों तक उठा कर अपने पेट पर रख कर बांध लीजिए, फिर इसके बाद आपको सना पढ़ना होगा जो इस तरह है,

Sana in Hindi | सना हिन्दी मे

“सुब हान कल-लाहुम्मा व बिहमदिका व-त बारकस्मुका व-त आला जददुका वला इलाहा गेंरुक”। ये पढ़ने के बाद आप अऊज़ुबिल्लाही मिनाश सैतानिर्रजिम बिस्मिल्लाह हिर्रहमा निर्रहीम पढ़ेंगे फिर आप सूरह फातिहा पढ़ेंगे जो कि इस तरह है – (सूरह फातिहा का हिन्दी तर्जुमा और फजीलत जानने के लिए क्लिक करें)

  • आल्हामदुलीलही रब्बिल आलमीन
  • अर रहमा निर रहीम
  • मलिकि यौमिद्दीन
  • इययाक न अबुदु व इय्याका नस्तईन
  • इहदिनस सिरआतल मुस्तकीम
  • सिरताल लजीना अन अमता अलय हिम
  • गैरिल मॅगडूबी अलय हिम व लद दालीन। (आमीन)

दोस्तों जब आप सूरह फातिहा पढ़ ले तो फिर आप इसके बाद कुरान कि कोई सूरह या आयत पढ़ें जो भी आपको याद हो चोटी या बढ़ी जैसे कि मान लिजीए आपको सूरह माऊन या सूरह नास याद है तो आप इनमे से कोई पढ़ेंगे

(अगर आपको कोई भी सूरह नहीं याद है तो ये पोस्ट पड़ें Charo Qul In Hindi इससे आपको चार सूरह कि जानकारी हो जाएगी जिसे चारों कुल कहते है। ) आपको समझाने के लिए एक सूरह बता रहा हूँ जो इस तरह है

  • क़ुल अऊज़ु बिरब्बिन-नास
  • मलिकिन-नास
  • इलाहिन-नास
  • मिन शररिल वसवासिल ख़न्नास-
  • अल्लज़ी युवास्विसु फ़ी सुदूरिन्नास
  • मिनल-जिन्नति वन्नास

सूरह को पढ़ने के बाद आपको रुकु मे जाना है और आप रुकु इस तरह करेंगे जैसा मैं बता रहा हूँ, रुकु मे जाने के लिए आप अपने शरीर को आधा झुका लीजिए इस तरह कि आपकी पीठ सीधी हो इतनी कि अगर आपके पीठ पर एक ग्लास पानी रख दिया जाए तो वो गिरे नहीं,

फिर रुकु मे जाने के बाद आपको रुकु कि तसबिहात पढ़नी है जो इस तरह है – “सुबहाना रब्बीयल अज़ीम” आपको इसको 3 बार या फिर इससे ज्यादा भी आप पढ़ सकते है फिर ये पढ़ने के बाद आप समी अल्लाहु लिमन हमीदह कहते हुए आप एकदम सीधे खड़े हो जाएंगे,

सीधे खड़े होने के बाद आपको सीधे सजदे में जाना है, (अगर आप इमाम के पीछे नमाज़ पढ़ रहें है तब आपको रुकु से खड़े होने के बाद ये कहना होगा- “रब्बाना वा लकल-हम्द”) दोस्तों फिर सजदा आपको इस तरह करना है कि, सजदे पर जाते वक्त आपका घुटना जमीन पर लगेगा फिर आप अपने हाथ जमीन पर रखिए और फिर आपकी नाक जमीन पर रखेगी और फिर आपका माथा लगेगा,

ऐसे आपको सजदा करना है और आपको फिर सजदे मे ये तसबीह पढ़नी है – “सुबहाना रब्बिल अला” आपको इसको 3 बार या फिर इससे ज्यादा भी आप पढ़ सकते है,

सिजदा मे आपको सिजदे कि तसबीह पढ़नी है – “सुबहाना रब्बिल अला” आपको इसको 3 बार या फिर इससे ज्यादा भी आप पढ़ सकते है,

(NOTE: दोस्तों आप सजदे मे अल्लाह से दुआ भी मांग सकते है क्यूकि सजदे के वक्त आप अल्लाह से सबसे ज्यादा करीब होते है बैरहाल कई लोगों को ये नहीं पता कि पूरी नमाज़ हि अल्लाह से बात करने का जरिया है)

दोस्तों आपको कुल 2 सजदे करने है (एक सजदा करने के बाद बैठने को जलसा भी कहते है और इस दरमियान जो वक्त रहता है उसमे आप यह भी पढ़ सकते है लेकिन अगर आप नहीं पढ़ते तो भी आपकी नमाज़ हो जाएगी –

“अल्लाउम्मगफिर्ली, व अरहमनी, व आफिनी, व अहदीनी, व अर्ज़ुकनी” हुज़ूर सलल्लाहो अलैहि वसल्लम सजदे के दरमियान मे ये दुआ पढ़ते थे और ऐसी कई दुआ हुज़ूर से साबित है – Reference: Sunan Ibn Majah 898)

दोनों सजदे करने के बाद आपको फिर दूसरी रकात के लिए खड़े हो जाना है और फिर उसी तरह जिस तरह पहली रकात पढ़ी बिल्कुल उसी तरह दूसरी भी पढ़नी है बस इसमे आपको सजदे करने के बाद खड़े नहीं होना है और बैठे रहना है (जिसे जलसे कि हालत मे कहते है) और

और आपको फिर अत्तहियात पढ़ना है (नीचे लिखा हुआ है) लेकिन आपको एक चीज ध्यान रखनी है जब अत्तहियात पढ़ेंगे तो उसमे जब ये कहेंगे “अशहदु अल्लाह इलाहा इल्लल्लाहु” तब आपको अपने सीधे हाथ कि पहली उंगली को उठाना है, 

  • अत् तहिय्यातू लिल्लाही वस्सल वातू वत्तह्यीबातु
  • अस्सलामु अलैका या अय्यूहनबी वरहेमतुल्लाही वबरकातूहू
  • अस्सलामू अलैना वला इबादीस्साॅलेहीन
  • अशहदु अल्लाह इलाहा इल्लल्लाहु व अश्हदु अन्न मुहम्मदून अब्दुहू व रसूलूहू
  • अत्तहियात में जब ‘अशहदु अल्लाह इलाहा’ आयेगा तब आप अपनी शहादत की उंगली को उठा कर के छोड़ दें।
  • अत्तहियात के बाद आप दरूद शरीफ पढ़े, दरूद शरीफ पढ़ना जरूरी है।

ये पढ़ने के बाद आप खड़े हो जाएंगे फिर आपको सिर्फ सूरह फातिहा पढ़नी है और रुकु मे जाना है और उसी तरह नमाज़ पढ़ेंगे जिस तरह पहली रकात पढ़ी फिर आपको तीसरी रकात मे अत्तहियात पढ़ना है और ये पढ़ने के बाद

आपको दुरूद शरीफ (इसे दुरूद इब्राहिमी भी कहते है) पढ़नी जो इस तरह है –

  • अल्लाहुम्मा सल्ले अला
  • मुहम्मदिव व अला आलि मुहम्मदिन
  • कमा सललेँता अला इब्राहिम व अला आलि इब्राहिम इन्नक हमीदुम मजीद।
  • अल्लाहुम्मा बारिक अला मुहम्मदिव व अला आलि मुहम्मदिन
  • कमा बारकता अला इब्राहिम व अला आलि इब्राहिम इन्नक हमीदुम मजीद।

दुरूद शरीफ पढ़ने के बाद आपको दुआ-ए-मसूरा (Dua E Masura In Hindi) पढ़ना है जो इस तरह है –

  • अल्लाहुम्मा इन्नी ज़लमतू नफ़्सी ज़ुलमन कसीरा,
  • वला यग़फिरुज़-ज़ुनूबा इल्ला अनता,
  • फग़फिरली मग़ फि-र-तम मिन इनदिका, वर हमनी इन्नका अनतल गफूरूर्र रहीम।

ये पढ़ लेने के बाद आपको सलाम फेर देना है जो आप इस तरह करेंगे –

पहला सलाम फेरेंगे तो आप आपने दाए काँदे (Right Shoulder) पर देखते हुए कहेंगे अस्सलमों अलैकम वरहमातुलह, फिर दूसरा सलाम फेरेंगे तो आप आपने बाए काँदे (Left Shoulder) पर देखते हुए कहेंगे अस्सलमों अलैकम वरहमातुलह।

तो दोस्तों आपकी मगरीब की फर्ज नमाज़ हो चुकी है, किसी भी फर्ज नमाज़ के बाद, आप नमाज़ के बाद कि दुआ भी पढ़ सकते है जो इस तरह है –

  • अल्लाहुम्म अंतस्सलामु
  • व मिनकस्सलामु
  • व इलैक यरजिउस्सलामु
  • हाय्यीन रब्बना बिस्सलामि
  • व अदखिल ना दारस्सलामि
  • तबा-रकत रब्बना
  • व तआलय्-त या जल जलालि वाल इकरामिo

इसके बाद आप आयतुल कुर्सी पढ़ेंगे इस पर मैंने अलग से पोस्ट बनाया है उसे आप पढ़ सकते है उस पर मैंने इसका तर्जुमा और इसकी फजीलत के बारे मे बताया है।

आयतुल कुर्सी  पढ़ने के बाद आप ये तसबिहात भी पड़ें –

  • 33 बार सुब्हानलाह ( पाक है अल्लाह )
  • 33 बार अल्हम्दुलिल्लाह ( तमाम तरीफ़े अल्लाह के लिए है )
  • 34 बार अल्लाहु अकबर ( अल्लाह सबसे बढ़ा है )
  • 1 बार ला ईला-ह इल्लल्ला ( अल्लाह के सिवा कोई मआबूद नहीं है )

मगरीब कि 2 रकात सुन्नत / नाफिल नमाज इस तरह पड़ेंगे | Magrib Ki Namaz Ki Rakat

Magrib Ki Namaz Ka Tarika: दोस्तों आप मगरीब की नमाज कि 2 रकत सुन्नत और नाफिल बिल्कुल उसी तरह पढ़ेंगे जिस तरह और सुन्नत नमाज पढ़ी जाती है, पहले आपको नियत करनी होगी जैसे आप 2 रकात सुन्नत पढ़ रहे है तो आप नियत करेंगे, नियत कि मैंने 2 रकात नमाज सुन्नत मगरीब वास्ते अल्लाह-त-आला के रुख मेरा काबा शरीफ कि तरफ अल्लाहु अकबर।

और फिर आप सना पढ़ें और फिर सूरह फातिहा पड़ेगे और इसके बाद कोई सूरह और फिर रुकु करेंगे जैसे मैंने बताया है और फिर सजदा करना है,

फिर दूसरी रकात मे सिजदा करने के बाद आपको अत्तहियात पढ़ना है, अत्तहियात मे जब ये कहेंगे “अश्हदू अल्लाह इलाहा इल्लल्लाहु” तब आपको अपने सीधे हाथ कि पहली उंगली को उठाना है,

ये पढ़ने के बाद आप दुरूद शरीफ पढ़नी है और दुआ-ए-मसूरा पढ़नी है फिर आपको सलाम फेर देना है जिस तरह आपने फर्ज नमाज मे सलाम फेर उसी तरह, ये आपकी 2 रकात सुन्नत नमाज हो गई अब आपको 2 रकात नाफिल नमाज पढ़नी है,

जो बिल्कुल इसी तरह है बस इसमे आपको नियत नाफिल नमाज कि करनी होगी बस बाकी सब कुछ इसी तरह से होगा।

Conclusion

तो मुझे उम्मीद है की अब आपको Magrib Ki Namaz Ka Tarika के बारे मे मालूम हो गया होगा अगर आपको कुछ पूछना है तो हमे कमेन्ट करके या फिर हमारे सोशल मीडिया अकाउंट मे मैसेज करके पूछ सकते है, और इस पोस्ट को जरूर शेयर करे इससे हमे बहुत खुशी होगी,

और हमारी वेबसाईट Deengyaan.in पर आते रहे, इंशा अल्लाह इसी तरह की इनफार्मेशन मै आप तक पहुचता रहूँगा, अल्लाह हमारे और आपके गुनाहों को माफ फरमाए और हमे इस्लाम कि हर चोटी से बड़ी छीजे सीखने की हिदायत फरमाए, अस्सलाम अलैकुम व रहमतुल्लाह व बरकातहू। FACEBOOKTWITTERINSTAGRAM

FAQ’s (सवाल जवाब)

Q. मगरिब की नमाज में कितनी रकात पढ़ी जाती है?

Ans. दोस्तों मगरीब की नमाज मे कुल रकात 7 होती है, जिसमे 3 फर्ज 2 सुन्नत और 2 नाफिल होती है।

Q. मगरिब की नमाज में पहले क्या पढ़ा जाता है?

Ans. दोस्तों मगरीब की नमाज से पहले आपको वेसे तो कुछ नहीं पढ़ना होता क्यूकि इसमे पहले सुन्नत नमाज नहीं होती, इसमे पहले 3 रकात फर्ज नमाज होती है, और आपको नमाज से वुजू करना होगा और फिर नियत।

Q. मगरिब की नमाज़ की नियत कैसे बांधी जाती है?

Ans. अगर आप मगरिब कि फर्ज नमाज पढ़ने जा रहे है तो आप ऐसे नियत करेंगे आप कहेंगे नियत कि मैंने 3 रकात नमाज फर्ज मगरीब वास्ते अल्लाह-त-आला के रुख मेरा काबा शरीफ कि तरफ फिर इसके बाद अल्लाहु अकबर कहते हुए आप अपने हाथों को कानों तक उठा कर अपने पेट पर रख कर बांध लीजिए।

Q. मगरिब की नमाज में कौन कौन सी सूरत पढ़ी जाती है?

Ans. दोस्तों आपको कुरान कि जो भी सूरह या आयत याद हो चोटी या फिर बढ़ी आप मगरिब कि नमाज मे पढ़ सकते है। जैसे कि अगर सूरह माऊन या सूरह नास याद है तो आप ये भी पढ़ सकते है।

Q. नमाज में सबसे पहले क्या पढ़ा जाता है?

Ans. नमाज से सबसे पहले नियत होती है फिर सना पढ़ना होता है फिर इसके बाद सूरह फातिहा और कोई कुरान कि कोई सूरह या फिर आयात पढ़ी जाती है।

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